प्रवासी पक्षियों का झुंड पहुंचा बर्ड विलेज मेनार, ज्यादा तादाद में आये ग्रे लेग गूज

बर्ड विलेज के नाम से मशहूर हुए मेनार के जलाशयों पर विदेशी मेहमान परिंदों का आना शुरू हो गया है। धंड तालाब पर फिलहाल 600 से ज्यादा ग्रे लेग गूज आए हैं।

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हर दूसरे दिन कोई न कोई नई प्रजाति आमद दर्ज करवा रही है। खास बात यह कि इनकी संख्या भी कम नहीं है। धंड तालाब पर फिलहाल ग्रे लेग गूज आए हैं। यहां 600 से ज्यादा गूज हैं, जो करीब छह हजार किलोमीटर की दूरी तय कर प्रवास के लिए आए हैं। शनिवार की शाम धण्ड तालाब पर डूबते सूरज और झुंड में उतरते प्रवासी पक्षियों का नजारा दिलकश था।

विभिन्न प्रजातियों के पक्षी पहले ही पहुंच चुके हैं। जैसे जैसे सर्दी पड़ेगी इनकी संख्या में इजाफा होगा, फरवरी के अंत तक इनका बसरा रहेगा। मेनार के दोनों तालाब पर प्रतिवर्ष करीब 150 प्रजातियों के देशी विदेशी मेहमान परिंदा डेरा डालते हैं । मेनार के धण्ड तालाब एवम् ब्रह्म सागर एवम् इसके आस पास क्षेत्र के इलाकों में कुछ देशी और विदेशी पक्षियों का कलरव बरबस ही लोगों को अपनी ओर खींच रहा है। हालांकि अभी आने वाले प्रवासी पक्षियों की संख्या शुरुआती दौर में है, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक अब जैसे-जैसे सर्दी बढ़ेगी, वैसे वैसे इनकी संख्या में इजाफा होने लगेगा ।

ग्रे लेग गूज के बारे में...

  • सेंट्रल यूरोप और सेंट्रल एशिया के हैं मूल निवासी
    पक्षी विशेषज्ञ विनय दवे बताते हैं कि ग्रे लेग गूज सेंट्रल यूरोप और सेंट्रल एशिया से आते हैं। हंस की प्रजातियां बहुत ही कम हो गई हैं।
  • हंस से मिलता-जुलता है ग्रे लेग गूज
    ग्रे लेग गूज हंस की मिली-जुली प्रजाति होने से इसे भी हंस माना जाता है। जोर से आवाज करने वाला यह परिंदा काई के साथ तालाब के आसपास या खेतों से नर्म घास खाता है।
  • परिवार की तरह समूह में रहते हैं
    हल्के भूरे रंग के पंख, नारंगी चोंच और गुलाबी पैर इसकी पहचान हैं। परिवार की तरह समूह में रहना इसकी खासियत है।

स्त्रोत: पत्रिका

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