यह सब घटित हà¥à¤† फेलिसिटी थिà¤à¤Ÿà¤° की ओर से पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ 'महाà¤à¤¾à¤°à¤¤' के नाटय मंचन में। यहां पà¥à¤¨à¤¿à¤¤ इसà¥à¤¸à¤° ने 31 साल बाद फिर से अपने उसी अंदाज और सशकà¥à¤¤ अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ से महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ यà¥à¤— की याद दिलाई।
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बिड़ला आॅडिटोरियम à¤à¤• बार फिर दà¥à¤°à¥à¤¯à¥‹à¤§à¤¨ और दà¥à¤·à¥à¤¸à¤¾à¤¶à¤¨ की कà¥à¤Ÿà¥€à¤² हंसी से गà¥à¤‚ज उठा। à¤à¥€à¤® और दà¥à¤°à¥à¤¯à¥‹à¤§à¤¨ की गदा टकराने के साथ यहां दà¥à¤°à¥à¤¯à¥‹à¤§à¤¨ à¤à¤µà¤‚ सूरà¥à¤¯ पà¥à¤¤à¥à¤° करà¥à¤£ की नि:सà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥ तथा निशà¥à¤›à¤² मितà¥à¤°à¤¤à¤¾ à¤à¥€ देखने को मिली। यह सब घटित हà¥à¤† फेलिसिटी थिà¤à¤Ÿà¤° की ओर से पà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤à¥à¤¤ 'महाà¤à¤¾à¤°à¤¤' के नाटय मंचन में। यहां पà¥à¤¨à¤¿à¤¤ इसà¥à¤¸à¤° ने 31 साल बाद फिर से अपने उसी अंदाज और सशकà¥à¤¤ अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ से महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ यà¥à¤— की याद दिलाई। शकà¥à¤¨à¥€ मामा बने गà¥à¤«à¥€ पेंटल का जाना पहचाना किरदार सà¤à¥€ के मन में पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ का किरदार फिर से जीवंत कर उठा। यहां पितामह à¤à¥€à¤·à¥à¤® दà¥à¤°à¥à¤¯à¥‹à¤§à¤¨ को अहंकार व ईषà¥à¤°à¥à¤¯à¤¾ तà¥à¤¯à¤¾à¤—ने की सलाह à¤à¥€ देते हैं। मामा शकà¥à¤¨à¥€ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ बिछाया गया चौसर का जाल, दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¤à¥€ का सà¥à¤µà¤¯à¤‚वर, दà¥à¤°à¥à¤¯à¥‹à¤§à¤¨ à¤à¤µà¤‚ à¤à¥€à¤® का दà¥à¤µà¤‚दà¥à¤µ सरीखे कई à¤à¤¸à¥‡ दृशà¥à¤¯ रोमांचित करने वाले हैं।
'सà¥à¤µà¤¯à¤‚ करो संघरà¥à¤· जगत में नारी यह सिखलाà¤à¤—ी...' और 'कौन पूछता रंग पानी का जाति वे लड़ते हैं...लाज नहीं आती है आपको जात पूछने वाले' जैसे दमदार व रोचक संवादों ने दरà¥à¤¶à¤•ों को ताली बजाने पर मजबूर कर दिया। à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤° पà¥à¤¨à¤¿à¤¤ इसà¥à¤¸à¤° के निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤¨ में रचा गठइस नाटक के दो शो आयोजित हà¥à¤ थे लेकिन किनà¥à¤¹à¥€à¤‚ कारणों से à¤à¤• ही शो हो सका।
इस नाटक में पà¥à¤¨à¤¿à¤¤ इसà¥à¤¸à¤° के साथ गूफी पेंटल, सिदà¥à¤µà¤¾à¤‚त इसà¥à¤¸à¤°, उरà¥à¤µà¤¶à¥€ ढोलकिया, राहà¥à¤² à¤à¥‚चर, मेघना मलिक, सà¥à¤°à¥‡à¤‚दà¥à¤° पाल, आरती नागपाल, विजेता à¤à¤¾à¤°à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤œ, दानिश अखà¥à¤¤à¤°, यशोधन राणा, करण शरà¥à¤®à¤¾ व रकà¥à¤·à¤¿à¤¤ à¤à¥‚चर सहित टीवी के कई सितारों ने अपने संवाद और अà¤à¤¿à¤¨à¤¯ से कला पà¥à¤°à¥‡à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को अचंà¤à¤¿à¤¤ कर दिया।
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