Khaas Khabar Mar 27, 2017, 09:19 IST
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à¤à¥€à¤²à¤µà¤¾à¤¡à¤¼à¤¾à¥¤ चार सौ चार वरà¥à¤· पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ नाहर नृतà¥à¤¯ की परंपरा आज à¤à¥€ जिले के माणà¥à¤¡à¤² कसà¥à¤¬à¥‡à¤‚ में कलाकारों ने जिंदा रखी हà¥à¤ˆ है। नाहर नृतà¥à¤¯ को देखने के लिठदेश à¤à¤° के लोग यहां जà¥à¤Ÿà¤¤à¥‡ हैं। रंगतेरस के पावन परà¥à¤µ पर वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ नाहर नृतà¥à¤¯ का à¤à¤µà¥à¤¯ आयोजन किया गया। इस दौरान सफेद रूई में लिपटकर नाहर बने नरà¥à¤¤à¤•ों ने पहले तो बड़ा मंदिर चौक सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ शेष सहाय धाम मठमनà¥à¤¦à¤¿à¤° में आकरà¥à¤·à¤• नृतà¥à¤¯ किया उसके बाद उनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡à¤‚ दशहरा चौक में गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£à¥‹à¤‚ का à¤à¤°à¤ªà¥‚र मनोरंजन किया। इस दौरान बज रहे मधà¥à¤° वादà¥à¤¯à¤¯à¤‚तà¥à¤°à¥‹à¤‚ की धà¥à¤¨ पर दरà¥à¤¶à¤• à¤à¥à¤® उठे। नाहर नृतà¥à¤¯ की यह परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ लगातार उस जमाने से चली आ रही है, जब शाहजहां मेवाड़़ से दिलà¥à¤²à¥€ जाते समय माणà¥à¤¡à¤² तालाब की पाल पर रूकेते थे।
राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ लोक कला केनà¥à¤¦à¥à¤° के अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· रमेश बà¥à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ का कहना है, नाहर नृतà¥à¤¯ करने वाले अधिकांश लोग उसी खानदान से हैं जिनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡à¤‚ शाहजहां के समकà¥à¤· पहली बार यह नृतà¥à¤¯ पेश किया था। आज à¤à¥€ इसी परिवार के लोग अपने पूरà¥à¤µà¤œà¥‹à¤‚ की परमà¥à¤ªà¤°à¤¾ को कायम रखे हà¥à¤ हैं।
नाहर नृतà¥à¤¯ वाला दिन माणà¥à¤¡à¤² कसà¥à¤¬à¥‡ के लिठकिसी दीपावली से कम नहीं होता। वजह है कि इस दिन घर-घर में à¤à¤• से बढक़र à¤à¤• मिठाईयां और खादà¥à¤¯ पदारà¥à¤¥ बनाठजाते हैं। इसको देखने के लिठसिरà¥à¤« राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ ही नहीं बलà¥à¤•ि देश के कई राजà¥à¤¯à¥‹à¤‚ से परà¥à¤¯à¤Ÿà¤• माणà¥à¤¡à¤² कसà¥à¤¬à¥‡ में आते हैं।
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