Patrika news network Posted: 2017-03-01 10:30:53 IST
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जयपà¥à¤°
'मंजिल उनà¥à¤¹à¥€à¤‚ को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कà¥à¤› नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है कà¥à¤› à¤à¤¸à¤¾ ही सच कर दिखाया 15 वरà¥à¤·à¥€à¤¯ अवनी लेखरा ने।
जयपà¥à¤° की पैरा निशानेबाज अवनी लेखरा ने दà¥à¤¬à¤ˆ में आयोजित पैरा शूटिंग विशà¥à¤µ कप के 10 मीटर à¤à¤¯à¤° राइफल सà¥à¤ªà¤°à¥à¤§à¤¾ में रजत पदक जीतने का गौरव हासिल किया है। इस शानदार परफॉरà¥à¤®à¥‡à¤‚स के बाद अवनी मंगलवार को जयपà¥à¤° लौट आईं। 'घर वापसी' पर इस टैलेंटेड पà¥à¤²à¥‡à¤¯à¤° का शानदार सà¥à¤µà¤¾à¤—त-अà¤à¤¿à¤¨à¤¨à¥à¤¦à¤¨ किया गया।
यहां जगतपà¥à¤°à¤¾ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ आशियाना अपारà¥à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट के सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ लोगों ने तो अवनी का शानदार तरीके से सà¥à¤µà¤¾à¤—त किया। अपारà¥à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट के मà¥à¤–à¥à¤¯ दà¥à¤µà¤¾à¤° पर अवनी का सà¥à¤µà¤¾à¤—त बैंड और ढोल-ताशे की मधà¥à¤° धà¥à¤µà¤¨à¤¿ के साथ हà¥à¤†à¥¤ इसके बाद यहां के निवासियों ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गà¥à¤²à¤¦à¤¸à¥à¤¤à¥‡ देकर और माला व साफा पहना कर अà¤à¤¿à¤¨à¤¨à¥à¤¦à¤¨ किया। ये सिलसिला यहीं नहीं थमा। इसके बाद वरà¥à¤²à¥à¤¡ कप में पदक विजेता अवनी की आरती उतारी गई और फिर कार से पूरी सोसाइटी का चकà¥à¤•र लगाकर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बधाइयां दीं। इस अवसर पर अवनी के साथ दà¥à¤¬à¤ˆ से लौटीं उनकी मां का à¤à¥€ सà¥à¤µà¤¾à¤—त किया गया।
इस विजेता खिलाड़ी की इस उपलबà¥à¤§à¤¿ पर उसकी पीठथपथपाने के लिठयहां जगतपà¥à¤°à¤¾ शूटिंग रेंज के निदेशक अजय सिंगा, राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पैरालंपिक समिति के महासचिव दिनेश उपाधà¥à¤¯à¤¾à¤¯ सहित कई पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨à¤¿à¤• अफसर à¤à¥€ पहà¥à¤‚चे।
मां-पिता-कोच को दिया सफलता का शà¥à¤°à¥‡à¤¯
अवनी ने कहा कि यदि कोई à¤à¥€ किसी à¤à¥€ काम में अपना शत-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ देता है तो उसे सफलता अवशà¥à¤¯ मिलती है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी सफलता का शà¥à¤°à¥‡à¤¯à¤¾ अपनी मां शà¥à¤µà¥‡à¤¤à¤¾ लेखरा, पिता पà¥à¤°à¤µà¥€à¤£ लेखरा और कोच चंदन सिंह को दिया।
अवनी के पिता पà¥à¤°à¤µà¥€à¤£ लेखरा और मां शà¥à¤µà¥‡à¤¤à¤¾ लेखरा ने कहा कि पेरेंटà¥à¤¸ को अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ पर à¤à¤°à¥‹à¤¸à¤¾ करना चाहिà¤, तो वो किसी à¤à¥€ लकà¥à¤·à¥à¤¯ को पा सकते हैं। अवनी के परिजनों ने विशà¥à¤µ कप में पहली बार पैराशूटरà¥à¤¸ की टीम à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡ के लिठपैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· राव इंदरजीत सिंह का आà¤à¤¾à¤° जताया और पैरालंपिक में à¤à¥€ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ टीम à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡ की आशा जताई।
अपने आप को किया साबित
अवनी के कोच चंदन सिंह का कहना है कि डिसेबल होने के बावजूद अवनी में गजब का आतà¥à¤®à¤µà¤¿à¤¶à¥à¤µà¤¾à¤¸ है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि दो साल के बहà¥à¤¤ कम समय में अवनी ने विशà¥à¤µ कप में वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤—त रजत पदक जीत कर अपने आप को साबित कर दिया है।
कोच सिंह का कहना है कि अवनी पैरालंपिक तक का सफर तय करने की कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ रखती है और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ है कि वह ओलंपिक में पदक जीतकर लाà¤à¤—ी। अवनी और उनके कोच ने इसके लिठतैयारियां शà¥à¤°à¥‚ कर दी हैं।
अà¤à¤¿à¤¨à¤µ की बायोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ से मिली पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾
अवनी ने बताया à¤à¤•à¥à¤¸à¥€à¤¡à¥‡à¤‚ट के बाद उनके पिताजी ने उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अà¤à¤¿à¤¨à¤µ बिनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ की बायोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ लाकर दी। उससे उनकी निशानेबाजी में रà¥à¤šà¤¿ जगी और वह घर के पास में ही सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ शूटिंग रेंज पर जाकर अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करने लगी। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बताया कि कोच के निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤¨ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करने के साथ मैंने अपना शत-पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ देना शà¥à¤°à¥‚ किया तो मà¥à¤à¥‡ सफलताà¤à¤‚ मिलती चली गईं।
सदमे से उबरने में लगा थोड़ा समय
अवनी के पिता पà¥à¤°à¤µà¥€à¤£ लेखरा ने बताया कि 2012 में वह धौलपà¥à¤° में कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ थे। उसी दौरान जब वह जयपà¥à¤° से धौलपà¥à¤° जा रहे थे तो सड़क दà¥à¤°à¥à¤˜à¤Ÿà¤¨à¤¾ में पिता-पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ दोनों घायल हो गà¤à¥¤ पà¥à¤°à¤µà¥€à¤£ लेखरा तो कà¥à¤› समय बाद सà¥à¤µà¤¸à¥à¤¥ हो गठलेकिन अवनी को तीन महीने असà¥à¤ªà¤¤à¤¾à¤² में बिताने पड़े फिर à¤à¥€ रीड की हडà¥à¤¡à¥€ में चोट के कारण वह खड़े होने और चलने में असमरà¥à¤¥ हो गई।
लेखरा ने बताया कि इसके बाद वह बहà¥à¤¤ निराशा से à¤à¤° गई और अपने आप को कमरे बंद कर लिया। माता-पिता के सतत पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸à¥‹à¤‚ के बाद अवनी में आतà¥à¤® विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ लौटा और अà¤à¤¿à¤¨à¤µ बिनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ की बायोगà¥à¤°à¤¾à¤«à¥€ से पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾ लेकर वह निशानबाजी करने लगी।
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