उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ जैसे बड़े राजà¥à¤¯ का संचालन करना आसान कारà¥à¤¯ नहीं है, लेकिन राजे पूरे धैरà¥à¤¯ और कà¥à¤¶à¤²à¤¤à¤¾ से सà¤à¥€ को साथ लेकर पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ को आगे बà¥à¤¾ रही हैं।
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मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ वसà¥à¤‚धरा राजे ने कहा कि धारà¥à¤®à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤² जन-जन की आसà¥à¤¥à¤¾ और विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ के केंदà¥à¤° होते हैं। राजà¥à¤¯ सरकार à¤à¤¸à¤¾ कोई कदम नहीं उठाà¤à¤—ी, जिनसे धारà¥à¤®à¤¿à¤• आसà¥à¤¥à¤¾ के केंदà¥à¤°à¥‹à¤‚ को नà¥à¤•सान पहà¥à¤‚चे। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि जैन समाज को सरकार पर विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ रखना चाहिà¤à¥¤ पदमपà¥à¤°à¤¾ और बरखेड़ा के अपने तीरà¥à¤¥à¥‹à¤‚ की रकà¥à¤·à¤¾ को लेकर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ विचलित होने की आवशà¥à¤¯à¤•ता नहीं है। राजà¥à¤¯ सरकार जैन समाज की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾à¤à¤‚ आहत नहीं होने देगी।
राजे शà¥à¤•à¥à¤°à¤µà¤¾à¤° को जैन मà¥à¤¨à¤¿ तरà¥à¤£ सागर महाराज के मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ निवास पर आगमन के दौरान उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥à¤“ं को संबोधित कर रही थीं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि मेरा सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ है कि इतने बड़े संत के चरण मेरे निवास पर पड़े हैं और उनकी चरण-वंदना का सà¥à¤…वसर मà¥à¤à¥‡ मिला है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि मीठा हर कोई बोलता है, लेकिन कà¥à¤°à¤¾à¤‚तिकारी मà¥à¤¨à¤¿ तरà¥à¤£ सागर अपने कड़वे पà¥à¤°à¤µà¤šà¤¨à¥‹à¤‚ के माधà¥à¤¯à¤® से देश और समाज को नई दिशा दे रहे हैं।
मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ ने कहा कि ईशà¥à¤µà¤°à¥€à¤¯ कृपा और संतों का मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ मà¥à¤à¥‡ हमेशा मिला है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि तीरà¥à¤¥à¥‹à¤‚ पर मेरा अटूट विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ है और मैं हमेशा इनके आगे शीश à¤à¥à¤•ाती हूं। à¤à¤¸à¥‡ में किसी à¤à¥€ धरà¥à¤® के आसà¥à¤¥à¤¾ सà¥à¤¥à¤² का अहित हम कà¤à¥€ नहीं सोच सकते।
मà¥à¤¨à¤¿ ने पिचà¥à¤›à¤¿à¤•ा लगाकर मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ को दिया आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦
इससे पहले मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ ने अपने निवास के पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤° पर मà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤°à¥€ की अगवानी की और पाद पà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾à¤²à¤¨ कर वंदना की। मà¥à¤¨à¤¿ ने मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ के सिर पर पिचà¥à¤›à¤¿à¤•ा रखकर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ दिया और कहा कि वे राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ को देश का अगà¥à¤°à¤£à¥€ राजà¥à¤¯ बनाने के संकलà¥à¤ª में हमेशा सफल हों। मà¥à¤¨à¤¿à¤¶à¥à¤°à¥€ को विदा करने के लिठराजे मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¦à¥à¤µà¤¾à¤° तक गईं।
मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ पर पूरा विशà¥à¤µà¤¾à¤¸, जो कहती हैं, वहीं करती हैं
इस अवसर पर धरà¥à¤® सà¤à¤¾ को संबोधित करते हà¥à¤ मà¥à¤¨à¤¿ तरà¥à¤£ सागरजी ने कहा कि मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ वसà¥à¤‚धरा राजे बहà¥à¤¤ ही विनमà¥à¤° हैं और वे जो कहती हैं, वही करती हैं। जैन समाज को मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ पर पूरा विशà¥à¤µà¤¾à¤¸ है। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ जैसे बड़े राजà¥à¤¯ का संचालन करना आसान कारà¥à¤¯ नहीं है, लेकिन राजे पूरे धैरà¥à¤¯ और कà¥à¤¶à¤²à¤¤à¤¾ से सà¤à¥€ को साथ लेकर पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ को आगे बà¥à¤¾ रही हैं।
नहीं करें जà¥à¤²à¥‚स और पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨
जैन मà¥à¤¨à¤¿ तरà¥à¤£ सागर ने जैन समाज के लोगों से कहा कि वे अपने तीरà¥à¤¥ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° को लेकर किठजाने वाले जà¥à¤²à¥‚स या पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ को वापस लें और समाज की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ का आदर करने के लिठमà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ का आà¤à¤¾à¤° वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ करें। मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ की संवेदनशीलता पर जैन समाज की ओर से उनका आà¤à¤¾à¤° वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ किया गया।
सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤: नà¥à¤¯à¥‚ज़18
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