IIFS: श्रीगंगानगर का पहला इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल, दिखाई जाएंगी 19 देशों की 62 फिल्में

पहले इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल ऑफ श्रीगंगानगर में 19 देशों की 62 फिल्में दिखाई जाएगी। फिल्म फेस्टिवल की ओपनिंग पंजाबी फिल्म 'चम' से होगी।

Scroll down for more.!

श्रीगंगानगर में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म फ़ेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है। इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल ऑफ़ श्रीगंगानगर यानि 'इफ़फ़स' में 19 देशों की 62 फिल्में दिखाई जाएगी। 5 दिवसीय यह फिल्म फेस्टिवल किन्नू की खेती के लिए मशहूर गंगनहर-घग्घर इलाके के नोजगे पब्लिक स्कूल में 19 जनवरी से शुरू हो रहा है जो 23 जनवरी तक चलेगा। फिल्म फेस्टिवल की ओपनिंग पंजाबी फिल्म 'चम' से होगी। इसे नॉन कंपीटिशन केटेगरी में दिखाया जाएगा। इस बारे में जानकारी सांझा करते हुए फेस्टिवल डायरेक्टर डॉ.दुष्यन्त ने बताया कि हमारे पास पहले साल के इस आयोजन में 38 देशों की 165 फिल्में आई, जिसे हमारी 9 सदस्यों वाली ज्यूरी ने देखा और 61 फिल्में चुनी है। प्रिव्यू कमेटी में सिनेमा, रंगमंच और कला से जुड़े मृत्युंजय प्रभाकर (शांति निकेतन), भारती पंवार (मुम्बई) डॉ.ममता धवन (दिल्ली), अभिषेक गोस्वामी(जयपुर), परिवाश निजादेह (ईरान), नीलेश प्रताप सिंह(मुम्बई), इरा टाक (मुम्बई), डॉ.अदिति कामथ (पुणे) व पंकज दुबे (मुम्बई) शामिल थे।

किसानों के दर्द और संघर्ष की दास्तान है 'चम'

फ़िल्म फेस्टिवल के फाउंडर डायरेक्टर सुभाष सिंगाठिया ने बताया कि फिल्म फेस्टिवल की शुरूआत किसानों के दर्द और संघर्ष की दास्तान बताने वाली पंजाबी फिल्म चम से होगी। ओपनिंग सेरेमनी के बाद इस फिल्म को दिखाया जाएगा। 1 घंटे 39 मिनट की यह फिल्म पंजाब में दलित किसानों की त्रस्त ज़िन्दगी के अनछुए पहलुओं को पर्दे पर लाती है। यह फ़िल्म उम्मीद और निराशा के बीच झूलते दो भाइयों की कहानी है, जो कर्ज की मार सहते- सहते भ्रष्ट राजनीतिक सिस्टम के भी शिकार हो जाते हैं। अंत तक आते आते फ़िल्म सम्पूर्ण भारत के किसान और ग्रामीण जीवन के संघर्ष का महाकाव्य बन जाती है।

नेशनल अवार्ड विनर फिल्ममेकर राजीव कुमार की पंजाबी फिल्म 'चम' पिछले साल कान फ़िल्म फेस्टिवल में दिखाई जा चुकी हैं। इससे पहले 'नाबर' के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुके राजीव नॉन-कमर्शियल पंजाबी सिनेमा के ऐसे डायरेक्टर हैं जिन्हें दुनिया के जाने- माने फेस्टिवल में बुलाया जाता है, वे कई अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म फेस्टिवल्स की ज्यूरी में रहे हैं। यह उनकी 7वीं फिल्म है। फ़िल्म के डायरेक्टर राजीव कुमार मुम्बई जबकि फ़िल्म के मुख्य अभिनेता, अभिनेत्री एवं अन्य कलाकार पंजाब से सीधे श्रीगंगानगर आ रहे हैं। वे फ़िल्म के बाद दर्शकों से संवाद करेंगे, सवालों के जवाब देंगे।

कंपीटिशन केटेगरी में खास फिल्में

ह्यूमन्स-जर्मनी

अवधि:1 घंटा 30 मिनट

निर्देशक:ओ क्लेन

पटकथा: विकलांग बच्चों की दुनिया को खंगालती डॉक्युमेंट्री फ़िल्म। इस वर्ग के मानवाधिकारों के लिए जगाती फ़िल्म। इसकी शूटिंग और रिसर्च 23 देशों में हुआ है।

हुवाई-रोमानिया

अवधि:1 घंटा 56 मिनट

निर्देशक:डेल कैरो

पटकथा:यह फ़िल्म रोमानिया की पृष्ठभूमि में युद्ध की विभीषिका को झेलते लोगों की मार्मिक दास्तान है।

कसाई-भारत, हिन्दी फिल्म

अवधि:1 घंटा 36 मिनट

निर्देशक: गजेंद्र एस श्रोत्रिय

पटकथा:राजस्थान की कहानी, चरणसिंह पथिक की साहित्यिक कहानी पर बनी फिल्म। गांव और गांव की राजनीति इस फ़िल्म का मुख्य विषय है। इस फ़िल्म में मीता वशिष्ठ , रिचा मीना, अशोक बांठिया प्रमुख एक्टर हैं।

द वन हु होल्ड्स सोवरन्टी ओवर एवरीथिंग-कोरिया

अवधि:1 घंटा 26 मिनट

पटकथा:यह डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म सृष्टि के बनने और दुनिया के निजाम की पश्चिमी दृष्टि को कहानी की तरह प्रस्तुत करती है। ईश्वर और धर्म की पश्चिमी व्याख्या को विस्तार से बताती है।

अंदरकाहिनी-भारत, बांग्ला

अवधि:1 घंटा 26 मिनट

निर्देशक- अर्णब के मिड्या

पटकथा:रिश्तों की महीन बुनावट और जीवन के तानेबाने को दिखाती है, फ़िल्म की कहानी बताती है कि छोटी छोटी चीजों से जीवन कैसे बदलता है।

महाकुंभ-भारत, हिन्दी

अवधि:46 मिनट

निर्देशक : संदीप कुमार

पटकथा:कुंभ मेले पर बनी डॉक्युमेंट्री फ़िल्म। मेले के सामाजिक सांस्कृतिक पहलुओं को दिखाती है।

पूया: इन द सर्किल ऑफ टाइम-जर्मनी

अवधि: 1 घंटा 26 मिनट

निर्देशक: शाहबाज़ नोशीर

पटकथा:यह फ़िल्म एक संघर्षशील फिल्ममेकर की कहानी कहती है। उसकी मुश्किलों और यात्रा का चित्रण करती है।

नॉन-कंपीटिशन केटेगरी में खास फिल्में

मीचक समारोह-भारत, पंजाब

अवधि:1 घंटा 58 मिनट

निर्देशक: डॉ.सुखप्रीत एस.गिल

पटकथा:एक मैरिज फोटॉग्राफर की कहानी जो स्टाइल फोटोग्राफी करता है। एक लड़की उससे अपनी शादी में सिंपल फोटोग्राफी के लिए कहती है तो उसके लिए चुनौती खड़ी हो जाती है।

गुटरुं-गुटरगूं -भारत, हिन्दी

अवधि:1 घंटा 30 मिनट

निर्देशक:प्रतीक शर्मा

पटकथा:यह फिल्म टॉयलेट की समस्या पर पहली हिंदी फीचर फिल्म है, इसके बाद 'टॉयलेट एक प्रेमकथा' रिलीज हुई थी। इस फ़िल्म को बहुत चर्चा मिली थी, इसके गीत कोटा के मूल निवासी प्रसिद्ध कवि गीतकार कुमार शिव  (जस्टिस शिव कुमार शर्मा ) ने लिखे हैं, संगीत बॉलीवुड के फेमस म्युजिक डायरेक्टर रोहित शर्मा ने दिया है। 'गुटरगूँ ' के निर्माताओं ने 'टॉयलेट- एक प्रेमकथा' के निर्माताओं पर कॉपीराइट का केस भी किया था।

बाजार-भारत, हिंदी

अवधि:दो घंटे

निर्देशक:सागर सरहदी

पटकथा:क्लासिक फ़िल्म बाजार को इसलिए दिखाया जाएगा कि इसके निर्देशक सागर सरहदी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड दिया जा रहा है। फारुख शेख, नसीरुद्दीन शाह, स्मिता पाटिल और सुप्रिया पाठक के अभिनय वाली यह फ़िल्म करोगे याद तो हर बात याद आएगी, देखलो आज हमको जी भरके जैसे गानों के लिए याद कीजाती है। इस फ़िल्म को दुनिया के फ़िल्म इंस्टीट्यूट में विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है।

माह-ए-मीर -पाकिस्तान, उर्दू

अवधि:2 घंटे 28 मिनट

पटकथा:फेस्टिवल में 2017 में पाकिस्तान से ऑस्कर नॉमिनेटेड फ़िल्म माहेमीर खास तौर पर दिखाई जाएगी। दिल्ली के शायर मीर तकी मीर की ज़िंदगी को पर्दे पर लाने वाली इस फ़िल्म का निर्देशन-लेखन अंजुम शहजाद और सरमद सहबाई ने किया है। इसे पाकिस्तान के फ़िल्म इतिहास की सबसे अच्छी फिल्मों में से एक माना गया है।

स्प्रिंग थंडर

नेशनल अवार्ड विनर फिल्ममेकर श्रीराम डाल्टन के निर्देशन में बनी फ़िल्म 'स्प्रिंग थंडर' फेस्टिवल की आखिरी फ़िल्म होगी जिसे समापन समारोह में 23 जनवरी को अवार्ड सेरेमनी के बाद दिखाया जाएगा। फेस्टिवल के फाउंडर डायरेक्टर सुभाष सिंगाठिया ने बताया कि पिछले साल इस फ़िल्म को अमेरिका के बेएरिया फ़िल्म फेस्टिवल में बेस्ट डायरेक्टर अवार्ड मिला था। गौहाटी फ़िल्म फेस्टिवल में इस फिल्म का इंडियन प्रीमियर हुआ था। फ़िल्म झारखंड में आदिवासियों के अपनी ज़मीन और मूल अधिकारों की लड़ाई के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए प्रकृति के साथ मनुष्य के तालमेल-सहजीवन का बड़ा संदेश देती हैं।

Tags

See Also