रणथंबोर टाइगर रिजरà¥à¤µ में पà¥à¤°à¤¾à¤—ैतिहासिक गà¥à¤«à¤¾ चितà¥à¤° खोजे गये
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सवाई माधोपà¥à¤°: राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ के रणथंबोर टाइगर रिजरà¥à¤µ के केलादेवी जंगलों में पहली बार लगà¤à¤— 2,000 वरà¥à¤· पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥€ गà¥à¤«à¤¾ चितà¥à¤° खोजे गये हैं| ये चितà¥à¤° सैंकड़ो की तादाद में विंधà¥à¤¯ परà¥à¤µà¤¤ शà¥à¤°à¥ƒà¤‚खला पर करीब 150 किमी तक फैले हैं जो इस बात की तरफ इशारा करते हैं की इस पूरी शà¥à¤°à¥ƒà¤‚खला पर पà¥à¤°à¤¾à¤—ैतिहासिक आदिवासी रहा करते थे|
यहाठके कंज़रवेशन बायोलॉजिसà¥à¤Ÿ धरà¥à¤®à¥‡à¤¨à¥à¤¦à¥à¤° खाणà¥à¤¡à¤² ने बताया की उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अब तक आरटीआर में à¤à¤¸à¥‡ चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ की अनà¥à¤à¥‚ति नहीं थी| उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इन चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ की जानकारी आसपास के गाà¤à¤µà¥‹à¤‚ के रहवासी व सीसीà¤à¤« वनà¥à¤¯à¤œà¥€à¤µ सà¥à¤µà¤¯à¤‚सेवकों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ मिली|
चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ के वरà¥à¤£à¤¨ में उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा की “ये शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• यà¥à¤— के हैं और कैलादेवी रेंज में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ सांकà¥à¤° गांव में सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ हैं| इस जगह को पहले शà¥à¤°à¥€à¤¨à¤¾à¤¥à¤ªà¥à¤°à¤¾ à¤à¥€ कहा जाता था। सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ बोली में इन पेंटिंगà¥à¤¸ को 'गà¥à¤°à¥à¤œà¤°à¥€ के चापी' के नाम से जाना जाता है और ये 2,000 साल से à¤à¥€ अधिक पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ हैं।”
गौरतलब है की, कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में चटà¥à¤Ÿà¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर बनी सà¤à¥€ चितà¥à¤° वनà¥à¤¯ जीवन से जà¥à¥œà¥‡ हà¥à¤ है। अनà¥à¤®à¤¾à¤¨ लगाया जा रहा है की ये चितà¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚à¤à¤¿à¤• à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• समय में बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को शिकà¥à¤·à¤¿à¤¤ करने के लिठबनाठगये थे।
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