à¤à¥€à¤²à¥‹à¤‚ की नगरी के कलाकार दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ समà¥à¤¦à¥à¤°à¥€ à¤à¤¾à¤— की अनूठी कला
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“इकलौती संतान होने के कारण मेरे माता पिता मà¥à¤à¥‡ लेकर बहà¥à¤¤ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• थे। बचपन में वे मà¥à¤à¥‡ पड़ोस के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के साथ खेलने तक नहीं जाने देते थे। यह 1950 से 1960 का दौर था जब मेरे पास खाली समय वà¥à¤¯à¤¤à¥€à¤¤ करने के लिठजà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ विकलà¥à¤ª à¤à¥€ नही थे इसीलिठमैंने उस समय खà¥à¤¦ को वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤ रखने के लिठचितà¥à¤°à¤•ारी का सहारा लिया। समय के साथ में इस कला में निपà¥à¤£ होता गया हालांकि उचà¥à¤š शिकà¥à¤·à¤¾ मैंने विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ से की थी। वासà¥à¤¤à¤µ में, मà¥à¤à¥‡ à¤à¥‹à¤ªà¤¾à¤² के रीजनल इंजीनियरिंग कॉलेज में à¤à¤¡à¤®à¤¿à¤¶à¤¨ à¤à¥€ मिल गया था लेकिन मेरे माता-पिता ने मà¥à¤à¥‡ वहाठजाने नहीं दिया। इस तरह में विजà¥à¤žà¤¾à¤¨ से दूर और कला के समीप आता गया। मैंने कला जगत में गणित का आशà¥à¤°à¤¯ लेकर मॉडरà¥à¤¨ आरà¥à¤Ÿà¥à¤¸ में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ किया और शनैः शनैः इस आधà¥à¤¨à¤¿à¤• कला में कà¥à¤¶à¤² होता गया। मेरी रचनाà¤à¤‚ आज à¤à¥€ कई आरà¥à¤Ÿ गैलरीज़ में लगी हà¥à¤ˆ हैं।
वह शिलà¥à¤ª जिसने मà¥à¤à¥‡ कला जगत में à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ पहचान दिलाई उससे मेरी à¤à¥‡à¤‚ट काफी समय बाद हà¥à¤ˆà¥¤ हमारे घर पर शीशा साफ़ करने की सामगà¥à¤°à¥€ आया करती थी। यह उस समय की बात हैं जब रासायनिक कà¥à¤²à¥€à¤¨à¤° ने à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ बाजार में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ नहीं किया था। उनà¥à¤¹à¥€ सामगà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में सà¥à¤–ाया गया समà¥à¤¦à¥à¤°à¥€ à¤à¤¾à¤— à¤à¥€ था। कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® और मैगà¥à¤¨à¥€à¤¶à¤¿à¤¯à¤® कारà¥à¤¬à¥‹à¤¨à¥‡à¤Ÿ से यà¥à¤•à¥à¤¤ अमà¥à¤¦à¤°à¥€ à¤à¤¾à¤— का पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤— विरासती à¤à¤µà¤¨à¥‹à¤‚ की खिड़कियां साफ करने के लिठकिया गया था। बाद में मà¥à¤à¥‡ इससे जà¥à¤¡à¥€ अनà¥à¤¯ जानकारिय मिली जैसे इसमें औषधीय गà¥à¤£ हैं और वैदà¥à¤¯ इसका उपयोग दवा बनाने में करते है। तब से मैंने इस साधारण से दिखने वाले ततà¥à¤µ में रूचि लेना शà¥à¤°à¥‚ किया। साल 1963 में मैंने पहली समà¥à¤¦à¥à¤°à¥€ à¤à¤¾à¤— की पेंटिंग बनाई। उसके बाद यह अनूठी कला मà¥à¤à¥‡ अलग ही सफ़र पर ले गयी जहाठइसने मà¥à¤à¥‡ अपेकà¥à¤·à¤¾à¤“ं से परे उपलबà¥à¤§à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ दिलाई। 1982 में मà¥à¤à¥‡ अपना पहला राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ार मिला। उसके बाद कई अनà¥à¤¯ संसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ ने मà¥à¤à¥‡ इस अनूठी कला के लिठपà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ृत किया। लेकिन इन पà¥à¤°à¤¸à¥à¤•ारों से à¤à¥€ बà¥à¤•र जिस चीज़ ने मà¥à¤à¥‡ पà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ किया वह थी लोगो की पà¥à¤°à¤¶à¤‚सा। कई विखà¥à¤¯à¤¾à¤¤ लोग जैसे चà¥à¤¨à¤¾à¤µ आयà¥à¤•à¥à¤¤ तिरà¥à¤¨à¥‡à¤²à¥ˆ नारायण अइयर शेषन, महाराणा अरविनà¥à¤¦ सिंह मेवाड़, राज सिंह, अमिताठबचà¥à¤šà¤¨, लता मंगेशकर, धरà¥à¤®à¥‡à¤‚दà¥à¤°, अशोक बिड़ला, शंकर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ शरà¥à¤®à¤¾, अटल बिहारी वाजपेयी, पी.वी शरà¥à¤®à¤¾, राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤ªà¤¤à¤¿ à¤à¤µà¤¨ की मà¥à¤–à¥à¤¯ कला कà¥à¤¯à¥‚रेटर शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ विमला शरà¥à¤®à¤¾, और राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€ à¤à¤¾à¤·à¤¾ के पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ महाकवि शà¥à¤°à¥€ कनà¥à¤¹à¥ˆà¤¯à¤¾à¤²à¤¾à¤² सेठिया, ने मà¥à¤à¥‡ इस अदà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯ कला के लिठबधाई दी और इसमें आगे बà¥à¤¨à¥‡ के लिठपà¥à¤°à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤¾à¤¹à¤¿à¤¤ किया।”
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