सामान ढोने का काम करने वाले बीà¤à¤¡ पास पिता का 15 साल का बेटा रोशन कर रहा नाम
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जोधपà¥à¤°. शहर के लोकेश खीची ने नेशनल जूनियर बॉकà¥à¤¸à¤¿à¤‚ग चैंपियनशिप में पहले ही पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ में बà¥à¤°à¤¾à¤‚ज पदक हासिल किया। गà¥à¤°à¥à¤µà¤¾à¤° को जब लोकेश गà¥à¤µà¤¾à¤¹à¤¾à¤Ÿà¥€ से जोधपà¥à¤° पहà¥à¤‚चे तो रेलवे सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ पर शहर के मà¥à¤•à¥à¤•ेबाजों ने उनका à¤à¤¾à¤µà¤à¥€à¤¨à¤¾ सà¥à¤µà¤¾à¤—त किया। उनके पिता ओमपà¥à¤°à¤•ाश जोधपà¥à¤° रेलवे सà¥à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ पर कà¥à¤²à¥€ हैं। लोकेश ने अपने वरà¥à¤— में शानदार पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ करते हà¥à¤ सेमीफाइनल में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ किया था।
15 साल के लोकेश ने 12वीं पास की है और वे यहां जयनारायण वà¥à¤¯à¤¾à¤¸ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ परिसर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ बॉकà¥à¤¸à¤¿à¤‚ग रिंग में कोच विनोद आचारà¥à¤¯ की देखरेख में अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करते हैं।
लोकेश के पिता ओमपà¥à¤°à¤•ाश की कहानी à¤à¥€ दिलचसà¥à¤ª है। वे सà¥à¤¨à¤¾à¤¤à¤• हैं और बीà¤à¤¡ à¤à¥€ कर रखी है। शà¥à¤°à¥‚ में वे तराजू ठीक करने का काम करते थे। बाद में रेलवे में लोको पायलट और टीसी के लिठपरीकà¥à¤·à¤¾ दी, लेकिन सफल नहीं हà¥à¤à¥¤
वे 13 से 15 घंटे तक कà¥à¤²à¥€ को काम करके अपने परिवार को पालते हैं। साथ ही खेलों के शौकीन हैं। ओमपà¥à¤°à¤•ाश का सपना है कि उनका बेटा ओलिंपिक पदक हासिल करे, इसके लिठवे अपने सà¥à¤¤à¤° पर उसे सब कà¥à¤› उपलबà¥à¤§ कराà¤à¤‚गे। लोकेश की मां अलका गृहिणी हैं।
विनोद आचारà¥à¤¯ ने बताया कि लोकेश ने आठसाल की उमà¥à¤° में उनसे मà¥à¤•à¥à¤•ेबाजी के गà¥à¤° सीखने शà¥à¤°à¥‚ किठथे। आचारà¥à¤¯ का कहना है कि लोकेश पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¤¾à¤¶à¤¾à¤²à¥€ हैं और आगे à¤à¥€ अचà¥à¤›à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ करेंगे।
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