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बहु वादक दोस्त अरोड़ा

दोस्त अरोड़ा जयपुर के एक बहुत ही प्रतिभाशाली आत्म-सिखाया बहु वादक और संगीतकार है जो 35 से अधिक वाद्ययंत्रों बजा सकते हैं ।

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हम 2001 में जयपुर आये थे जब मेरे पापा का जयपुर आर्मी हॉस्पिटल में ट्रांसफर हुआ था | उस समय मैं सांतवीं क्लास में था और 2008 में मैंने आर्मी स्कूल जयपुर से 12वीं पास करी |

दिल्ली के KPMG में कुछ महीने काम करने के बाद मुझे लगा के ये करियर मेरे लिए नहीं है | तो जॉब छोड़कर मेने संगीत की तरफ अपने जज़्बे का पीछा किया | जॉब छोड़ने के बाद मैंने इकोनॉमिक्स में मास्टर्स की डिग्री हासिल की और उसके साथ ही खुदसे ही वेब डेवलपमेंट भी सीखा |

मैंने खुदकी एक वेब डेवलपमेंट कंपनी भी शुरू की थी लेकिन साल भर बाद ही मुझे लगा के संगीत को ज्यादा वक़्त देना चाहिए |

संगीत को व्यवसाय की तरह चुनने का मेरा कोई प्लान नहीं था | वो बस हो गया | मैं एक उच्च शिक्षित पेशेवरों के परिवार का हिस्सा हूँ तो शिक्षा शुरू से ही काफी अहमियत रखती थी | अतिरिक्त पाठयक्रम के अनुसार मैंने स्कूल बैंड में हिस्सा लिए और पांच वर्ष की उम्र में कांगो पर अपनी पहली प्रस्तुति दी | उसके कुछ वर्ष पश्चात जयपुर आने पर मेने एक ड्रमर के तौर पर स्कूल बैंड का हिस्सा बना |

संगीत को हमेशा से एक शौक की तरह ही देखा और शिक्षा की तरफ ज्यादा ध्यान दिया लेकिन जॉब ने मुझे ये एहसास कराया के संगीत के लिए मेरे जुनून को एक मौका ज़रूर देना चाहिए ताकि मैं उस तरफ पूरा ध्यान लगा सकूँ, जो जॉब पर रहते मुमकिन नहीं था |

आर्मी डॉक्टर होने की वजह से पापा का हर कुछ साल में ट्रांसफर हो जाता था जिस वजह से मैं संगीत की उचित तालीम ना ले सका | तो मैंने खुद ने ही संगीत सीखना शुरू किया और सालो की लगन और मेहनत के बाद आज मैं 35 से ज्यादा वाद्ययंत्र बजा लेता हूँ | मैंने ज्यादातर जो सीखा वो कलाकारों की वाद्ययंत्र बजाते हुए रिकॉर्डिंग को सुनकर और फिर उन्ही धुनों (नोट्स ) को अपने साधन पर वापस बजाने की कोशिश करके सीखा | लेकिन इसमें काफी समय लगा और मैं आज भी रोज़ाना 4-5 घंटे तक रियाज़ करता हूँ |

संगीत की पृष्ठभूमि से ना होने की वजह से मुझे काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा क्यूंकि मेरे पास कोई गुरु या मार्गदर्शक नहीं था | काफी संघर्ष करने के बाद आखिरकार मेरी प्रतिभा को पहचान मिल ही गई जब संतूर सम्राट पंडित शिव कुमार शर्मा, गीतकार प्रसून जोशी, लोकप्रिय पत्रकार अर्नब गोस्वामी और रजत शर्मा जैसे प्रसिद्ध लोगो ने मुझे सराहा |

मैं अब तक कईं जगह प्रस्तुति दे चूका हूँ जिनमें दुबई योग समारोह, अबू धाबी समारोह, दिल्ली हाट, आर्ट ऑफ़ लिविंग का एक समारोह जहाँ श्री श्री रवि शंकर जी खुद मौजूद थे, इस्कॉन मंदिर जयपुर और दुबई में इस्कॉन भजन संध्या प्रमुख हैं | इसके अलावा मैंने कईं गैर सरकारी संगठनों के अनुदान संचयन कार्यक्रमों में भी प्रस्तुति दी है जैसे आश्रय संस्था द्वारा पशुओं के हित में होटल क्लार्क्स आमेर जयपुर में एक कार्यक्रम हुआ था |

मैंने एक शास्त्रीय संगीतकार के रूप में शुरुआत करी थी और हाल ही में बॉलीवुड संगीत की तरफ रूचि दिखाने लगा हूँ क्यूंकि भारत में शास्त्रीय संगीत की मांग काफी कम है | एक संगीतकार के तौर पर मैं ये मानता हूँ की खुदसे ज्यादा आपके श्रोतागण मायने रखते है | एक प्रस्तुतकर्ता के तौर पर ये मेरी जिम्मेदारी बनती है की मैं अपने दर्शक और श्रोतागणों की मांग का ध्यान रखते हुए उन्हें मनोरंजन प्रदान करू और मैं काफी खुश हूँ के मैं ये मेरी अब तक की सारी प्रस्तुतियों में कर पाया हूँ |

मुझे और मेरे संगीत के बारे में और जानने के लिए आप मुझे यूट्यूब और फेसबुक पर फॉलो कर सकते है जहाँ मैं अपने वीडियो अपलोड करता रहता हूँ |

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