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पुण्य कमाने के लिए नवरात्रों में भंडारे करते हैं, मगर पुण्य से ज़्यादा पाप कर बैठते हैं

केंद्र सरकार ने निर्देश दिए हैं कि अब से नवरात्रों में भंडारे करने वालों को पहले स्थानीय निगम या निकाय से वैध अनुमति लेनी होगी।

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Bhandara In Chaitra Navratri 2019

Bhandara In Chaitra Navratri 2019

आज चैत्र मास, कृष्ण पक्ष प्रतिपदा से चैत्र नवरात्र शुरू होते हैं। इस दिन भारतीय संस्कृति का नव वर्ष भी प्रारम्भ होता है। जिसे हम नवसंवत्सर के नाम से जानते हैं। सम्पूर्ण भारत वर्ष में ये नववर्ष अलग-अलग रूप में मनाया जाता है। कहीं नवसंवत्सर के रूप में तो कहीं गुड़ी पड़वा के रूप में। कहीं बैसाखी के रूप में तो कहीं ग्रीष्म नवरात्रों के रूप में। कहते हैं इस दिन माँ दुर्गा का जन्म हुआ था। इसलिए आज के दिन से नवरात्रों की शुरुआत मानी जाती हैं।

वैसे तो इंसान हमेशा ही दूसरे प्रणियों की सेवा कर। साल भर पुण्य कमाने की कोशिश करता हैं। लेकिन किसी त्यौहर या उत्सव के मौक़े पर। वह अधिक से धर्म और पुण्य कार्य करता है। पुण्य कमाने के इसी सिलसिले में वह पाप भी कर बैठता है। वैसे एक पुराणी कहावत भी तो है... "तीरथ चाल्या दुई जणा, चित चंचल मन चोर, एक ही पाप न उतरया दस मण लाया और!" अर्थात एक बार मनुष्य का मन और चित दोनों तीर्थ करने गए। मगर चूँकि मनुष्य का चित चंचल होता है और मन चोर होता है। इसलिए ये दोनों ही मनुष्य के बस में नहीं रह पाते। परिणामतः वह इंसान तीर्थ पर पुण्य कमाने की बजाय पाप और कमा लाते हैं।

ठीक ऐसा ही हम और आप करते हैं। नवरात्रों और अन्य धार्मिक अवसरों पर हम पुण्य कमाने के लालच में भंडारा करते हैं। उस भंडारे में पुण्य कमाने से ज़्यादा हम पाप कर बैठते हैं। भंडारा स्थल पर हम गन्दगी फ़ैला देते हैं। कचरा कर देते हैं। इससे उस जगह का सौंदर्य तो खत्म होता है। साथ ही वातावरण भी प्रदूषित होता है। और तो और प्लास्टिक का उपयोग करके। उसे जहाँ तहाँ फेंक देते हैं। जिसे खाने से आवारा और पालतू पशुओं की मृत्यु भी हो जाती है। इसलिए बार केंद्र सरकार ने इस तरह के भंडारे करने पर इस बार रोक लगा दी है। अगर किसी को भण्डरा करना है। तो उसे नवरात्रों में सड़कों और मंदिरों के आस-पास भंडारे लगाने की अनुमति लेनी होगी। केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने इस संबंध में निर्देश जारी किया है। इसमें सभी नगर निगमों को ‘जीरो वेस्ट नवरात्र' सुनिश्चित करने को कहा गया है।

निर्देश में स्पष्ट रूप से कहा गया है। कोई भी व्यक्ति अगर 50 से अधिक लोगों के लिए भंडारा करता है। तो उसे संबंधित निगम से इजाजत लेनी होगी। इसके साथ ही भंडारा लगाने वाले व्यक्ति या संस्था को। भंडारे के स्थान के 100 मीटर के दायरे में सफाई व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी। सफाई व्यवस्था सुनिश्चित नहीं करने की स्थिति में निगम की ओर से संबंधित संस्था या विभाग का चालान काटा जा सकता है।

सोशल मीडिया पर दें अपडेट

केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव और स्वच्छ भारत मिशन के निदेशक वीके जिंदल की ओर से दिल्ली के तीनों निगमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नवरात्रों के दौरान मंदिरों के आस-पास सफाई व्यवस्था की फोटो ट्विटर और फेसबुक के माध्यम से मंत्रालय के साथ शेयर करें।

प्लास्टिक के प्लेटों का प्रयोग न करें

मंत्रालय की ओर से दिए गए निर्देशों में कहा गया है कि कोई भी मंदिर या धार्मिक संस्थान इस दौरान प्रसाद बांटने के लिए प्लास्टिक या स्टायरोफोम की प्लेटों का उपयोग न करे। इसमें सभी निगमों को मंदिरों के पुजारियों, महंतों या मैनेजमेंट कमेटी के सदस्यों से बात कर नवरात्रों के दौरान बेहतर सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

बेहतर प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कृत किया जाएगा

मंत्रालय की ओर से दिए गए निर्देशों में कहा गया है कि नवरात्र खत्म होने के बाद निगमों की ओर से नवरात्रों के दौरान सफाई व्यवस्था के मामले में बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को पुरस्कृत भी किया जाए। जिससे, आने वाले दिनों में भी सफाई व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए लोगों को प्रोत्साहन मिले। इसके लिए हर भंडारे या प्रसाद केंद्र के आस-पास कूड़ेदान की व्यवस्था किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

कूड़े का मौके पर निस्तारण

इसके साथ ही मंदिरों के आसपास कंपोस्टिंग पिट भी बनाए जाएं, ताकि इस दौरान निकलने वाले कूड़े का मौके पर ही निस्तारण किया जा सके। इसमें आमलोगों की भागीदारी भी बढ़ाने को कहा गया है। आम आदमी के जुड़ने से जीरो वेस्ट नवरात्र को पूरा करने में आसानी होगी।

गीले-सूखे कूड़े के लिए अलग इंतजाम करने होंगे

नवरात्रों के दौरान मंदिरों में गीले और सूखे कूड़े के लिए अलग से इंतजाम करने होंगे। लोगों को भंडारा और प्रसाद बांटने के बाद अकसर देखा गया है कि मंदिर परिसर के आस-पास गंदगी इकटठी हो जाती है। इसके लिए निगमों से कहा गया है कि वे मंदिरों के साथ सामंजस्य बैठाएं और गीले-सूखे कूड़े को अलग करने की व्यवस्था मंदिरों में ही की जाए।

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