राजà¥à¤¯ की पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ लोक कला के महतà¥à¤¤à¥à¤µ को समà¤à¤¤à¥‡ हà¥à¤ पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ ने हाल ही में à¤à¤• कारà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¤¾ का आयोजन किया
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पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ªà¤—ढ़: राजà¥à¤¯ के पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ªà¤—ढ़ जिले में पारंपरिक लोक कला, मांडना, को संरकà¥à¤·à¤¿à¤¤ करने के लिठ20 दिवसीय पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤£ कारà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¤¾ का समापन इस सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹à¤¾à¤‚त में हà¥à¤†à¥¤ कारà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¤¾ में जिले के विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ से आई आदिवासी महिलाओं ने à¤à¤¾à¤— लिया और उनके योगदान के कारण कारà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¤¾
मांडना चितà¥à¤°à¤•ारी राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ की à¤à¤• लोक कला हैं जिसके चिनà¥à¤¹ पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ सà¤à¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं से जà¥à¥œà¥‡ माने जाते हैं। यह à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤šà¥€à¤¨ शैली हैं जिसमें घर की दीवारों और गृहतलों को पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक सामगà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सजाया जाता हैं। सौनà¥à¤¦à¤°à¥à¤¯à¥€à¤•रण के अतिरिकà¥à¤¤ लला गेरू और शà¥à¤µà¥‡à¤¤ खà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‡ से बने इन मांडनों को अचà¥à¤›à¥‡ शगà¥à¤¨ का दà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤• à¤à¥€ मन जाता हैं।
मांडने आमतौर पर सरल जà¥à¤¯à¤¾à¤®à¤¿à¤¤à¥€à¤¯ आकारों, जैसे तà¥à¤°à¤¿à¤•ोण और चौकोर से बने होते हैं । इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ आकारों को à¤à¤•साथ मिलाकर मांडनों का आकार दिया जाता हैं। इन मांडनों में मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¤à¤ƒ पारंपरिक रचनाओं को à¤à¥€ जोड़ा जाता हैं जैसे ‘पगà¥à¤²à¤¿à¤’, ‘देवडी’ इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿à¥¤
मांडनों की à¤à¤• और खासियत यह हैं की इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आज à¤à¥€ टहनियों व कपास से बनाया जाता हैं। चूà¤à¤•ि इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ आमतौर पर तà¥à¤¯à¥Œà¤¹à¤¾à¤°à¥‹à¤‚ के दौरान पूजा इतà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¿ के उपयोग के लिठबनाया जाता हैं, कलाकार इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गिलहरी या घोड़ों के बालों से बने बà¥à¤°à¤¶ से बनाना पसंद नही करते।
पारंपरिक तौर पर कलाकार सरà¥à¤µà¤ªà¥à¤°à¤¥à¤® फरà¥à¤¶ व दीवारों को गोबर मिशà¥à¤°à¤¿à¤¤ मिटà¥à¤Ÿà¥€ से लीपतें हैं। उसके बाद वे लाल गेरू व शà¥à¤µà¥‡à¤¤ चूने से विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ आकृतियाठबनाते हैं और उनमे पारमà¥à¤ªà¤°à¤¿à¤• à¤à¤°à¤¨à¥€ à¤à¤°à¤¤à¥‡ हैं। इस तरह से बने पारंपरिक मांडनों का आकरà¥à¤·à¤£ ही à¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ होता हैं जैसे वासà¥à¤¤à¤µà¤¿à¤• में इनमें कोई अलौकिक शकà¥à¤¤à¤¿ हो जो वातावरण को सकारातà¥à¤®à¤• तरंगों से à¤à¤° रही हो।
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