शारदीय नवरातà¥à¤°à¤¾ मेले की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤“ं, दरà¥à¤¶à¤¨à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की à¤à¥€à¥œ à¤à¤µà¤‚ परà¥à¤¯à¤Ÿà¤•ों की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ को दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤—त रखते हà¥à¤ 9 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर से 19 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर तक परà¥à¤¯à¤Ÿà¤•ों हेतॠहाथी सवारी‘ तथा रातà¥à¤°à¤¿à¤•ालीन परà¥à¤¯à¤Ÿà¤¨ पूरà¥à¤£à¤¤à¤¯à¤¾ बंद रहेगा।
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आमेर महल में खासतौर पर विदेशी परà¥à¤¯à¤Ÿà¤•ों के लिठगजराज यानि हाथी की सवारी खासी पसंद की जाती है। देसी परà¥à¤¯à¤Ÿà¤•ों ने à¤à¥€ इस सवारी का à¤à¤¡à¤µà¥‡à¤‚चर तहे दिल से सà¥à¤µà¥€à¤•ार किया है। जिस तरह से हाथी को सजा-धजा कर तैयार किया जाता है और जिस तरह हिचकोले खाती हà¥à¤ˆ यह सवारी आगे बढ़ती है, इसका अपना ही à¤à¤• मजा है। लेकिन आने वाले कà¥à¤› दिनों तक परà¥à¤¯à¤Ÿà¤•ों को इस सवारी से रà¥à¤¬à¤°à¥ होने का मौका नहीं मिलेगा। कहने का मतलब है कि कà¥à¤› दिनों तक आमेर महल का परà¥à¤¯à¤¾à¤¯ कही जाने वाली हाथी की सवारी को बंद कर दिया है।
असल में बà¥à¤§à¤µà¤¾à¤° से नवरातà¥à¤° शà¥à¤°à¥ हो रहे हैं। इन 9 दिनों में आमेर महल में बिराजी हà¥à¤ˆ शिलामाता के चरणों में सैंकड़ों की संखà¥à¤¯à¤¾ में à¤à¤•à¥à¤¤à¤—ण ढोक लगाने आते हैं। सà¥à¤¬à¤¹ 5 बजे से शाम 5 बजे तक यहां जमकर à¤à¥€à¤¡à¤¼ पड़ती है। à¤à¤¸à¥‡ में महल के जलेब चौक में शारदीय नवरातà¥à¤°à¤¾ मेले की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾à¤“ं, दरà¥à¤¶à¤¨à¤¾à¤°à¥à¤¥à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ की à¤à¥€à¥œ à¤à¤µà¤‚ परà¥à¤¯à¤Ÿà¤•ों की सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ को दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤—त रखते हà¥à¤ 9 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर से 19 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर तक परà¥à¤¯à¤Ÿà¤•ों हेतॠहाथी सवारी‘ तथा रातà¥à¤°à¤¿à¤•ालीन परà¥à¤¯à¤Ÿà¤¨ पूरà¥à¤£à¤¤à¤¯à¤¾ बंद रहेगा।
शारदीय नवरातà¥à¤°à¤¾ के दौरान परà¥à¤¯à¤Ÿà¤•ों की सà¥à¤µà¤¿à¤§à¤¾ हेतॠ10 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर से 18 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर तक आमेर महल में पà¥à¤°à¤µà¥‡à¤¶ की बà¥à¤•िंग वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ 'सिंह पोल' à¤à¤µà¤‚ 'तà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥‹à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ गेट' पर रहेगी। परà¥à¤¯à¤Ÿà¤•ों के निकासी की वà¥à¤¯à¤µà¤¸à¥à¤¥à¤¾ à¤à¥€ तà¥à¤°à¤¿à¤ªà¥‹à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ गेट से रहेगी।
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