अब भूकंप से 90 घंटे पहले जारी हो सकेगा अलर्ट, 15 सालों तक अरावली की हलचल पर शोध कर विकसित की प्रणाली

Patrika news network Feb 22, 2017, 10:29 IST

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भरत बोराणा/ उदयपुर- à¤¦à¥‡à¤¶ और दुनिया में भूकम्प और भूस्खलन आने के 90 घंटे पूर्व चेतावनी जारी की जा सकेगी जिससे आपदा से होने वाले भारी नुकसानों से बचा जा सकेगा। यह प्रणाली विकसित की है उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के भू-वैज्ञानिक डॉ. गोविन्द सिंह भारद्वाज ने। डॉ. भारद्वाज ने बताया कि स्लॉप एंड अर्थ क्वेक फेलियर अर्ली वार्निंग (एफएसईडब्ल्यू) प्रणाली को विकसित करने के लिए उन्होंने 15 साल तक अरावली की पहाडिय़ों में होने वाली हलचल पर शोध किया। 

यह प्रणाली भूकंप व  à¤­à¥‚स्खलन के दायरे, आवृत्ति, क्षेत्रीय विस्तार के साथ ही मूल स्थान की अक्षांश एवं देशांतर की जानकारी उपलब्ध कराने में सहायक है। इसके तहत विभिन्न सॉफ्टवेयर,  à¤­à¥Œà¤—ोलिक सूचना प्रणाली, पृथ्वी की कक्षा में स्थापित सेटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों का ऑनलाइन विश्लेषण किया जा सकेगा। प्रारंभिक स्तर पर विश्लेषण के आशाजनक परिणाम प्राप्त हुए। बाद में प्रोग्रामिंग एवं नैनो टेक्नोलॉजी पर आधारित सॉफ्टवेयर विकसित किया जाएगा। इसके तहत दुनियाभर में सात विश्लेषण केन्द्रों की आवश्यकता होगी। राजस्थान सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने शोध में आर्थिक सहायता दी।

ऐसे कार्य करेगी प्रणाली

विभिन्न प्रकार के सेंसर नेटवर्किं ग सॉफ्टवेयर्स (जिम्बी, कोसम्बो, इमोट आदि) को वायरलैस कम्युनिकेशन के माध्यम से एफएसईडब्ल्यू प्रणाली में प्रयुक्त किया जाएगा। इससे प्राप्त होने वाले आंकड़ों की साइज को ज्योग्राफिक कोऑर्डिनेट रेफरेंस, वल्र्ड जियोडेटिक्स, प्राइम मेरिडियम सिस्टम आदि से प्रमाणित किया जाएगा। इसके साथ ही ग्लोबल पॉजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) भी काम करेगा। सॉफ्टवेयर्स की मदद से विभिन्न वैरिएबल्स का ऑनलाईन सिम्युलेशन होने से कम्प्युटर स्क्रीन पर पृथ्वी के नक्शे की सॉफ्ट इमेज में नोड्स जनरेट होंगे। साथ ही विभिन्न कॉर्डिनेट्स पर मेटाडेटा के रूप में ग्राफ प्लॉट्स जनरेट होने से एक्सट्रीमा इमेज पर भूकंप व भूस्खलन का प्रभाव दिखेगा। साथ ही ऑनलाइन सॉफ्टवेयर न्यूमेटिकल एनालिसिस से प्रोपेबिलिटी इंडेक्स जनरेट होगा। जिससे पृथ्वी की सतह पर होने वाली हलचल की तीव्रता को मिमी./नैनो सेकण्ड में मापा जा सकेगा। तीव्रता की गति के आधार पर 90 घंटे के बाद उस स्थान पर भूकंप और भूस्खलन होना चिह्नित किया जा सकेगा। 

लगेगा पूर्वानुमान

पृथ्वी के भीतर विभिन्न कारकों के प्रभाव से खुद को रोके रखने की क्षमता में कमी के कारण अचानक ढलान ढह जाते हैं। ढलान ढहने में वर्षा एवं भूकम्प भी काफी अहम कारण हैं। इन घटनाओं और इनकी आवृत्ति में दिनों दिन बढ़ोतरी हो रही है। ऑनलाइन सॉफ्टवेयर न्यूमेटिकल एनालिसिस से प्रोबेबिलिटी इंडेक्स जनरेट करेगा, जो भूकम्प एवं भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर हो रही हलचल की तीव्रता को नैनो सेकण्ड में मापेगा। तीव्रता के आधार पर करीब 90 घंटे के बाद किसी स्थान पर आने वाले भूकम्प या भूस्खलन को चिह्नित किया जाएगा। 

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