15 फरवरी से जालोर महोत्सव में दिखेंगे संस्कृति के विभिन्न रंग

कल से शुरू होने जा रहे तीन दिवसीय जालोर महोत्सव में विभिन्न प्रतियोगिताओं के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम के ज़रिये राजस्थान की संस्कृति के विभिन्न रंग देखने को मिलेंगे।

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जालोर में 15 से 17 फरवरी तक जिला प्रशासन और जालोर विकास समिति की ओर से तीन दिवसीय जालोर महोत्सव चलेगा। इन तीन दिनों में जिलेभर में विविध आयोजन होंगे। 2013 से शुरू हुआ जालोर महोत्सव का इस बार यह छठा आयोजन है। जिसमें हजारों लोग शिरकत करेंगे। महोत्सव ने जालोर को पर्यटन के मानचित्र पर उभारा है। जालोर विकास समिति की ओर से प्रेरित होकर यहां के निवासी सभी कार्यक्रम प्रायोजित कर मिसाल पेश करते हैं। इस महोत्सव को देखने के लिए विदेशी भी आते हैं। इस बार महोत्सव में विभिन्न प्रतियोगिताओं के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम व राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का भी आयोजन होगा। इसके अलावा समापन पर कव्वाली का प्रोग्राम होगा।

महर्षि जाबालि ऋषि की तपोभूमि जालोर राजस्थान के दक्षिण पश्चिम भाग में स्थित है। उत्तर पश्चिम में तेल व खनिज के भंडार वाले बाड़मेर जिले से सटा व पाकिस्तान की सीमा के नजदीक है। कल्चर के मामले में आज भी यहां पारम्परिक एवं सांस्कृतिक पहचान कायम है। फिर चाहे वह देश-विदेश में कला का प्रदर्शन करने वाली गैर हो या फिर चंग पर किया जाने वाला नृत्य, महिलाओं का लूर हो या पुरुषों का ढोल नृत्य सब यही की देन है।

होली पर्व पर होने वाले अनूठे आयोजन इसे सभी से अलग पहचान देते हैं। किसी समय आहोर कस्बे में होने वाली भाटा गैर व भीनमाल की लट्ट गैर भी प्रसिद्ध थी।

स्त्रोत: न्यूज़18

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