राजस्थान में सुधरा बाल लिंगानुपात, 950 पर पहुंचा

प्रदेश में पिछले आठ साल से लिंगानुपात में लगातार सुधार हो रहा है। इन आठ वर्षों में लिंगानुपात 888 से बढ़कर 950 हो गया है।

Scroll down for more.!

राजस्थान में लिंगानुपात बढ़ने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाता नजर आ रहा है। प्रदेश में पिछले आठ साल से लिंगानुपात में लगातार सुधार हो रहा है। इन आठ वर्षों में लिंगानुपात 888 से बढ़कर 950 हो गया है। राज्य में वर्ष 2011 में एक हजार लड़कों पर मात्र 888 लड़कियां थी, अब इस संख्या में 62 तक की बढ़ोतरी हो गई है। प्रदेश में लिंगानुपात बढ़ने के पीछे बड़ा कारण पीसीपीएनडीटी एक्ट को माना जा रहा है। इस एक्ट का लोगों में डर होने के साथ ही प्रदेश में जागरूकता बढ़ी है जिसके कारण लिंगानुपात में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जिस गति से प्रदेश में लिंगानुपात बढ़ रहा है, उसे देखते हुए माना जा रहा है आने वाले दिनों में इस संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है।

इस मामले पर जागरूकता के लिए बेटी पंचायत योजना शुरू की है। इस महीने के अंत तक 8 हजार पंचायतों में इस योजना को पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।

Read more: à¤¨à¤ˆ सुविधाओं के साथ फिर से आ रही है प्रधानमंत्री जन-धन योजना

राजस्थान में लिंगानुपात बढ़ने की एक बड़ी वजह युवाओं में जागरूकता भी रही है। इसी का परिणाम है कि राज्य में लिंगानुपात के बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। पीसीपीएनडीटी एक्ट लागू होने के बाद भी इस बात को बल मिला है। पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत भ्रूण जांच करना बड़ा अपराध माना गया है। पीसीपीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन करने पर सेक्शन-25 के तहत अपराधी को तीन साल की सजा का प्रावधान है। इसके अलावा अगर कोई फर्जी तरीके से भ्रूण जांच करते हुए पकड़ा जाता है तो धारा-315 के तहत उस अपराधी को जुर्म में 10 साल की सजा का प्रावधान है।

Read more: हार्दिक पांड्या के रिप्लेसमेंट बनकर यूई पहुंचे दीपक चाहर

Tags

See Also