राजस्थान हाईकोर्ट ने बढाई फिल्म 'पद्मावत' की मुश्किलें

राजस्थान उच्च न्यायालय के जस्टिस संदीप मेहता की कोर्ट ने आगामी 23 जनवरी से पहले फिल्म कोर्ट के समक्ष प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं.

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विवादित फिल्म 'पद्मावती' का भले ही संजय लीला भंसाली ने नाम परिवर्तन कर 'पद्मावत' कर दिया हो लेकिन इसे लेकिर विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। राजस्थान उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली और अन्य की 482 की याचिका पर सुनाई करते हुए यह निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने यह निर्दश संजय लीला भंसाली, अभिनेता रणवीरसिंह और अभिनेत्री दीपिका पादुकोन पर नागौर के डीडवाणा थाने में दर्ज 17 फरवरी 2017 को दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई पर दिए हैं। तीनों पर आईपीसी की धारा 153 ए और 295 ए में एफआईआर दर्ज की गई थी।

इस एफआईआर को रद्द करवाने के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय में 482 की एक याचिका पेश की गई थी। इस पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट में यह दलील दी कि न ही फिल्म प्रदर्शित की गई है और न ही उसका ट्रेलर रिलीज किया गया है।

फिल्म को प्रदर्शन करने से पूर्व सिनेमाटोग्राफी अधिनियम 1952 के तहत बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन सेक्शन 5 ए के तहत सर्टिफिकेट लेना पड़ता है। जिस पर कोर्ट के कहां कि चूंकि एफआईआर में फिल्म में भद्दे सीन और इतिहास के साथ छेड़छाड़ का आरोप है। इसलिए कोर्ट इस एफआईआर को निरस्त फिल्म को देखे बगैर कैसे कर सकती है? इसलिए आगामी 23 जनवरी या उससे पूर्व इस फिल्म को कोर्ट के समक्ष दिखाए।

याचिकाकर्ता कि ओर से अधिवक्ता नीशांत बोड़ा ने पैरवी की वहीं सरकार की ओर से जेपी भारद्वाज ने पक्ष रखा। वीरेन्द्र सिंह और नागपाल सिंह ने यह एफआईआर दर्ज करवाई थी। कोर्ट के आदेश पर अधिवक्ता ने कोर्ट को कहा कि वह निर्माता संजय लीला भंसाली से पूछ कर बताएंगे कि कब फिल्म का प्रदर्शन कोर्ट के समक्ष करेंगे।

स्रोत: न्यूज़18

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