प्रिया सचदेव - उदयपुर की "चायवाली"

चाय, सामाजिक बाधाएं, सफलता और अपने सपनों के बारे में चर्चा पर प्रिया सचदेव | वे उदयपुर में "Three Addictions" नाम से चाय का ठेला चलाती हैं | जहाँ महिलाओं को एक सुरक्षित वातावरण के साथ ही पढ़ने के लिए किताबें और फ्री वाईफाई की सुविधा भी उपलब्ध हैं |

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अच्छा लगता है जब आपका काम ही आपकी पहचान बन जाता है | मेरा यही मानना है के काम कोई छोटा नहीं होता, सोच बड़ी हो तो सफलता महसूस की जा सकती है", ये कहना है प्रिया सचदेव का जो उदयपुर में "चायवाली" के नाम से प्रसिद्ध हैं | "चायवाली" बनने के लिए यात्रा शुरू करने से पहले, वह इवेंट्स का बिज़नेस कर रही थी और 5 साल तक नौकरी भी कर रही थी, लेकिन उनमें से कोई भी उन्हें वो संतुष्टि प्रदान नहीं कर पाया जिसकी उन्हें तलाश थी | #OhMyRajasthan! ने विशेष रूप से उनके साथ बात की, और जाना के कैसे अपने जुनून को एक सफल व्यवसाय में बदल, वो बन गयी उदयपुर की प्रिय "चायवाली" |  

चाय ही क्यों ?

मैं चाय की आदी हूँ | अक्सर चाय की थड़ी पर जाया करती थी चाय पीने | लेकिन हमेशा ऐसा होता था के कोई लड़का साथ हो तभी जा पाती थी | नहीं तो वहां जाने के बारे में थोड़ा सोचना पड़ता था क्यूंकि वहां पर हमेशा लड़को की भीड़ होती थी | एक लड़की होकर चाय की थड़ी पर चाय पीने जाने से वहां मौजूद लड़को के काफी टिप्पणियाँ सुननी पड़ती थी | तभी लगा के जब मुझे ऐसी चीज़ो का सामना करना पड़ता है तो बाकी लड़कियों को भी करना ही पड़ता होगा, कितना अच्छा हो अगर लड़कियों के लिए अलग से कोई चाय की थड़ी हो जो लड़की ही चलाये तो माहौल कितना अच्छा रहेगा | बस यही सोचके मैंने निश्चय किया के मैं खुद ऐसा ही एक चाय का ठेला शुरू करुँगी और साथ ही महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दूंगी |

अपने बारे में कुछ बताएं ?

मैं उदयपुर में जन्मी हुयी हूँ | मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखती हूँ जहाँ हमारी आर्थिक स्तिथि ज्यादा अच्छी नहीं है | 2008 में जब मैं 10वीं क्लास में थी तब से काम कर रही हूँ | मैंने ज़िन्दगी में बहुत उतार चढाव झेले है | पढ़ाई में कभी मन नहीं लगा इसीलिए हमेशा कुछ अलग करने का जूनून दिमाग में था | डॉक्टर इंजीनियर वकील सब बनते है लेकिन मुझे कुछ अलग करके अपनी पहचान बनानी थी | दुनिया की भेड़ चाल में खुद की एक अलग शख्सियत बनाने के लिए मैंने खुदका बिज़नेस शुरू किया |

आपको कैसी बाधाओं का सामना करना पड़ा ?

ये सफर मेरे लिए आसान नहीं था | 7 साल मैंने बहुत सी ठोकर खायी, बहुत से लोगों की अस्वीकृति का सामना करना पड़ा लेकिन हर चीज़ से मैंने कुछ नया ही सीखा और आगे बढ़ते चली गयी | समाज को ये गंवारा नहीं था के एक लड़की चाय की थड़ी चलाये | बहुत कुछ सुनना पड़ा, जैसे "लड़की होकर ठेला चलाना शोभा देता है क्या?", "लड़कियों का सड़क पर ऐसे बैठे रहना अच्छा लगता है क्या?", और भी काफी कुछ | मुझे मेरी जगह "Three Addictions" से हटाने के लिए काफी झूटी शिकायते भी दर्ज हुयी, काफी धमकियाँ भी मिली, लेकिन जब हौंसले बुलंद हो तो आप किसी भी मुश्किल का सामना कर सकते हो | और मेरे साथ वही हुआ |

7 साल के संघर्ष के बाद आज मुझे गर्व महसूस होता है जब लोग मुझे "चायवाली" के नाम से जानने लगे हैं |

आगे की क्या योजना है ?

चाय पीने और पिलाने के अलावा मुझे फोटोग्राफी का बहुत शौक है | आज काफी लड़किया बिना किसी परेशानी के मेरे ठेले पर आती है, चाय पीती है, मस्ती करती है, फ्री वाईफाई का लुत्फ़ उठती है, किताबे पढ़ती है | मेरा सपना है के मैं पुरे भारत में ऐसी और चाय की थड़ियां शुरू करूँ जो महिलाओं और लड़कियों को एक शांत और सुरक्षित वातावरण दे सके | इसके साथ ही मैं स्टाफ में भी महिलाओ और लड़कियों को ही रख कर महिलाओं को रोजगार और एक अलग पहचान दिलवाना चाहती हूँ |

झीलों की नगरी उदयपुर की प्रिया सचदेव सभी सामाजिक बाधाओं को तोड़, राजस्थान में युवा महिलाओं के लिए एक मजबूत उदाहरण स्थापित कर रही हैं !

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