Home news मोतियों की खेती को बà¥à¤¾à¤µà¤¾ देने के लिठराजसमनà¥à¤¦ में कारà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¤¾ का आयोजन
मोतियों की खेती को बà¥à¤¾à¤µà¤¾ देने के लिठराजसमनà¥à¤¦ में कारà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¤¾ का आयोजन
पारंपरिक खेती मे नठआयाम सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करते हà¥à¤ राजसमंद जिला मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ में परà¥à¤² फारà¥à¤®à¤¿à¤‚ग यानी मोती का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ करने को बढ़ावा देने के लिठà¤à¤• दिवसीय कारà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¤¾ का आयोजन हà¥à¤†à¥¤
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मेवाड़ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में पारंपरिक खेती मे नठआयाम सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ करते हà¥à¤ राजसमंद जिला मà¥à¤–à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के फतेहपà¥à¤°à¤¾ गांव में शिवसिंह चौहान नाम के à¤à¤• काशà¥à¤¤à¤•ार ने परà¥à¤² फारà¥à¤®à¤¿à¤‚ग यानी मोती का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ करने को बढ़ावा देने के लिठà¤à¤• दिवसीय कारà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¤¾ का आयोजन किया। इस कारà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¤¾ मे पांच जिलों के यà¥à¤µà¤¾ काशà¥à¤¤à¤•ारों ने à¤à¤¾à¤— लिया और जयपà¥à¤° से आई परà¥à¤² फारà¥à¤®à¤¿à¤‚ग टीम ने पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤• शिवरतन सैनी के नेतृतà¥à¤µ में किसानों को मोती की खेती करने की नवीन तकनीकी से अवगत कराया।
उनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ बताया कि à¤à¤• सीप से दो तरह की मोतियों की उपज की जा सकती है। इसमे दो डिजाइनर और à¤à¤• गोल मोती उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ किया जा सकता है। इन मोतियों की सूरत, जयपà¥à¤°, मà¥à¤‚बई सहित विदेश में जोरदार मांग है। अकेले जयपà¥à¤° में सौ से अधिक किसान परà¥à¤² फारà¥à¤®à¤¿à¤‚ग कर अतिरिकà¥à¤¤ आय पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ कर रहे हैं। गोल मोती की बाजार में कीमत à¤à¤• हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ से दो हजार रà¥à¤ªà¤¯à¥‡ तक है। जबकि डिजाइनर मोती पांच सौ से हजार रà¥à¤ªà¤ के बीच बिकता है।
गोल मोती बनने में à¤à¤• वरà¥à¤· का समय लगता है जबकि डिजाइनजर मोती पांच से सात माह में तैयार हो जाता है। पà¥à¤°à¤¶à¤¿à¤•à¥à¤·à¤• सैनी ने पà¥à¤°à¤¾à¤¯à¥‹à¤—िक तौर पर बताया कि सबसे पहले सीप का ऑपरेशन कर उसमें उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ की मांग के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बीज डाला जाता है। उसके साथ गोल या डिजाइन बीज को सीप मे सलीके से लगाकर à¤à¤• जाली में बांधा जाता है और उसे à¤à¤• टैंक बनाकर उसमें सात माह से à¤à¤• वरà¥à¤· तक रखा जाता है।
पानी का तापमान 20 से 35 डिगà¥à¤°à¥€ रखा जाता है और पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ दस घंटे ऑकà¥à¤¸à¥€à¤œà¤¨ देना होता है ताकि मोती का आकार परिवरà¥à¤¤à¤¿à¤¤ नहीं हो। इस तकनीक कम लागत में किसान पारंपरिक खेती के साथ नवीन तकनीक से अतिरिकà¥à¤¤ आय कमा सकता है। जिले में पहली बार आयोजित हà¥à¤ˆ इस कारà¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¤¾ में सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ किसानों ने à¤à¥€ रà¥à¤šà¤¿ दिखाई।
सà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤¤: नà¥à¤¯à¥‚ज़18
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