पैलेस ऑन व्हील्स अब नए रूप में

लक्ज़री ट्रेन पैलेस ऑन व्हील्स का जीवन चक्र हुआ पूरा अब नयी रेल से होगा ब्रांड का संचालन

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जयपुर: देश की लक्ज़री ट्रेनों में सर्वोच्च पद रखने पैलेस ऑन व्हील्स, इस सीजन से नए रूप में नज़र आएगी।

साल 1982 से अपना सफ़र शुरू करने वाली पैलेस ऑन व्हील्स ने इस वर्ष अपने जीवन चक्र के 35 वर्ष पुरे कर लिए हैं और अब जंग-संबंधी समस्याओं और कोडल जीवन के आधार पर इसे बंद करना आवश्यक हो गया हैं।

इस विषय पर आरटीडीसी के अध्यक्ष एन सी गोयल ने कहा की, “गत 35 वर्षों में, पलके ऑन व्हील्स ने खुद को एक प्रमुख पर्यटन उत्पाद के रूप में स्थापित किया है और विश्व यात्रा व्यापार में एक शानदार छवि ब्रांडिंग हासिल कर ली है। हम आरटीडीसी और भारतीय रेलवे की इस प्रमुख परियोजना के नाम को बरकरार रखना चाहते हैं।”

गौरतलब हैं की प्रमुख पर्यटन उत्पाद हैं माने जाने वाली इस ट्रेन के बंद होने से राज्य के पर्यटन को नुकसान होने की सम्भावना हैं। साथ ही साथ आरटीडीसी (राजस्थान टूरिज्म डेवलपमेंट कारपोरेशन) के पास इतना फण्ड भी नहीं है जिससे वह ट्रेन में नए रेक लगवा सके। इसी तहत आगामी पर्यटन सीजन से रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स को पैलेस ऑन व्हील्स के रूप में इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा गया है।

रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स (या आरआरओडब्ल्यू) साल 2008 से परिचालन में है और इन 9 वर्षों में ही इसने भारत की सबसे शानदार ट्रेनों में अपना नाम दर्ज करवा लिया हैं। बताया जाता हैं की लक्ज़री और सुविधा दोनों ही मामलों में रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स, पैलेस ऑन व्हील्स से बेहतर हैं पर इसकी ख्याति कम होने के कारण इसे उतना मुनाफा नही हो पाता था। नए बदलावों से रेलवे को अधिक मुनाफे के आसार हैं।

इस मामले में पैलेस ऑन व्हील्स के जनरल मैनेजर प्रदीप बोहरा का कहना हैं की “भारतीय रेल और आरटीडीसी के बीच पीओए के मौजूदा समझौते के तहत वर्तमान समय-सारिणी, टैरिफ और राजस्व साझाकरण पद्धति (56:44) पूर्व की भांति ही रहेगी। इसके साथ ही आरआरओडब्ल्यू का संचालन आगामी सीजन से बंद हो जाएगा। यात्रा के जरिए 24 करोड़ रूपये की अग्रिम बुकिंग पहले ही हो चुकी हैं। अब रेलवे बोर्ड से स्वीकृति मिलते ही, आरआरओडब्ल्यू को पीओए के द्योतक पीले रंग में रंग दिया जाएगा।”

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