पद्मा अवॉर्ड 2018: त्रिवेणी धाम के संत नारायणदास महाराज को मिला समाज सेवा के क्षेत्र में पद्मश्री अवॉर्ड

राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने राजस्थान के त्रिवेणी धाम के ब्रह्मपीठाधीश्वर नारायण दास महाराज को समाज सेवा के क्षेत्र में पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किया।

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को राजस्थान के त्रिवेणी धाम के संत नारायणदास महाराज को समाज सेवा के क्षेत्र में पद्मश्री अवॉर्ड प्रदान किया। ब्रह्मपीठाधीश्वर नारायण दास महाराज को यह सम्मान राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में दिया गया। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर उन्हें यह सम्मान दिए जाने की घोषणा की गई थी। उन्हें यह सम्मान दिए जाने से उनके शिष्य और श्रद्घालुओं में काफी उत्साह है।

नारायणदास महाराज ने समाज हित में कई स्कूल, कॉलेज खुलवाए और अस्पतालों का निर्माण करवाया है। साथ ही संस्कृत के उत्थान के लिए संस्कृत यूनिवर्सिटी का निर्माण करवाया है। नारायणदास महाराज ने इसके साथ ही कई पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार भी करवाया है।

बता दें कि जब महाराज को इस सम्मान दिए जाने की घोषणा की खबर मिल थी तो उन्होंने बड़ी सादगी से कहा था कि उन्होंने कोई कार्य नहीं किया है जिससे उनका सम्मान हो। सब काम जनता ने किए हैं। उन्होंने कहा था, मैंने भगवान की सेवा करके दो टाइम भोजन किया है। जहां तक सम्मान की बात है तो सम्मान जनता का होना चाहिए जिसने उनके कहने पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए। मैं तो स्वयं सदैव उनका ऋणी रहूंगा।

राजस्थान के प्रसिद्ध त्रिवेणी धाम के संतनारायणदास महाराज दशकों से प्राणी मात्र की सेवा एवं समाज के लिए अपनी खास पहचान रखते हैं। उनके रचनात्मक कार्यों में समाजहित की भावना रही है। नारायणदास त्रिवेणी एवं डाकोर दो स्थानों के बड़े संत हैं। वह गुजरात के डाकोर धाम के ब्रह्मपीठाधीश्वर की गद्दी पर भी महंत आसीन हैं।

माता पिता ने 6 साल की उम्र में ही सौंप दिया था गुरु को

संत नारायण दास महाराज को उनके माता पिता ने छह साल की उम्र में भगवान दास महाराज की शरण में दे दिया था। नारायणदास अपने गुरू की दिन रात सेवा करते थे। उन्होंने गुरू से दीक्षा ली और भगवान की सेवा में लग गए। संत नारायण दास जी महाराज का जन्म दिवस समूचे राजस्थान में अश्विनी माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी को धूम-धाम से मनाया जाता है।

पहले किया था पुरस्कार लेने से इनकार

सरकार द्वारा पद्मश्री के लिए उनका नाम भेजे जाने पर पहले तो उन्होंने इस पुरस्कार को लेने से इनकार कर दिया था लेकिन बाद में हामी भर दी थी।

संत नारायण दास महाराज का कहना था कि वे सामाजिक संत हैं। ऐसे में पुरस्कार नहीं ले सकते। उन्होंने कहा था कि सरकार के पास दूसरे विकल्प हैं, पुरस्कार के लिए सरकार उन लोगों को चुन सकती है।

स्त्रोत: न्यूज़18, खासखबर

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