राजस्थान में ख़त्म हुआ तीसरा मोर्चा

राजस्थान में राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) का भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में विलय और दो निर्दलिय विधायकों के भी भाजपा में शामिल होने के बाद प्रदेश में तीसरे मोर्चे का विकल्प लगभग समाप्त हो गया है।

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अब तक राजपा के प्रदेश अध्यक्ष किरोड़ी लाल मीणा, भाजपा के असंतुष्ट विधायक घनश्याम तिवाड़ी, निर्दलिय विधायक हनुमान बेनीवाल, रणधीर सिंह भींडर और मानिक चंद सुराणा मिलकर आगामी विधानसभा चुनाव में तीसरी राजनीतिक शक्ति खड़ी करने के प्रयासों में जुटे थे।

किरोड़ी लाल मीणा ने निर्दलिय हनुमान बेनीवाल के साथ मिलकर प्रदेश में पांच बड़ी रैलियां कर तीसरा मोर्चा बनाने की बात सार्वजनिक रूप से कही थी। वहीं निर्दलिय विधायक रणधीर सिंह भींड़र ने उदयपुर संभाग में पिछले एक साल में कई बड़ी सभाएं कर भाजपा और कांग्रेस का विकल्प तैयार करने की घोषणा की थी।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक पार्टी (राजपा ) के भाजपा में विलय और दो निर्दलिय विधायकों के भी भाजपा में शामिल होने की बात साफ होने के बाद प्रदेश में तीसरा मोर्चा बनाने के प्रयासों को झटका लगा है।

राजपा प्रमुख किरोड़ीलाल मीणा ने खुद कहा है कि अब तीसरे मोर्चे का कोई वजूद नहीं बचा है। किरोड़ी ने दावा किया है कि विधायक हनुमान बेनीवाल और नवीन पिलानिया भी उनके संपर्क में है। किरोड़ी मीणा के साथ राजपा विधायक नवीन पिलानिया अभी भाजपा में नहीं गए हैं। नवीन पिलानिया अब भी राजपा के साथ हैं। वहीं किरोड़ी के सहयोगी निर्दलीय हनुमान बेनीवाल भी भाजपा में जाने से इनकार कर रहे हैं। बेनीवाल अब भी नई पार्टी बनाकर मजबूत तीसरा मोर्चा बनाने की दावा कर रहे हैं।

प्रदेश में बसपा, आप, सपा और माकपा जैसी पार्टियां अपने स्तर पर अलग अलग चुनाव लड़ेंगी। इन छोटी पार्टियों का साथ आना फिलहाल मुमकिन नहीं लग रहा है। हालांकि राष्ट्रीय लोकदल, एनसीपी भी कुछ सीटों पर गठबंधन करके चुनाव लड़ने की संभावनाएं तलाश रही हैं, लेकिन तीसरे मोर्चे के मजबूत गठबंधन के प्रदेश में फिलहाल कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। कई सीटों पर ये पार्टियां वोटकटवा ही साबित होती हैं। विधानसभा चुनावों में अब महज आठ महीने का वक्त बचा है और ऐसे में फिलहाल मजबूत तीसरे मोर्चे की संभावनाएं ना के बराबर ही हैं।

स्त्रोत: जागरण, न्यूज़18

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