Home news PROUD OF RAJASTHAN@ फिर लिखा जाà¤à¤—ा इतिहास, हलà¥à¤¦à¥€à¤˜à¤¾à¤Ÿà¥€ à¤à¤ª करेगा गà¥à¤£à¤—ान, जानें खबर की गहराई
PROUD OF RAJASTHAN@ फिर लिखा जाà¤à¤—ा इतिहास, हलà¥à¤¦à¥€à¤˜à¤¾à¤Ÿà¥€ à¤à¤ª करेगा गà¥à¤£à¤—ान, जानें खबर की गहराई
Patrika news network Posted: 2017-02-22 10:29:04 IST
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जनारà¥à¤¦à¤¨ राय नागर राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ विदà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€à¤ विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ का डबोक परिसर में फिर से इतिहास लिखा जाà¤à¤—ा। यह वही सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ है जहां बà¥à¤°à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤¶ इंडिया कंपनी के पॉलिटिकल à¤à¤œà¥‡à¤‚ट करà¥à¤¨à¤² जेमà¥à¤¸ टॉड ने निवास करते हà¥à¤ आजादी से पूरà¥à¤µ राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ का इतिहास लिखा था। आज उसी सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ को करà¥à¤¨à¤² टॉड à¤à¤µà¤¨ के नाम से जाना जाता है।
विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ ने अब वहां महाराणा पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ª की विजय सà¥à¤®à¤¾à¤°à¤¿à¤•ा लगवाने का निरà¥à¤£à¤¯ किया है जिस पर हलà¥à¤¦à¥€à¤˜à¤¾à¤Ÿà¥€ यà¥à¤¦à¥à¤§ में महाराणा पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ª की जीत का वरà¥à¤£à¤¨ होगा यानी जहां राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ का इतिहास लिखा गया, वहीं उसमें बड़े बदलाव की पहल होगी।
गौरतलब है कि विदà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥€à¤ के निरà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¤¨ में मीरा कनà¥à¤¯à¤¾ महाविदà¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के डॉ. चंदà¥à¤°à¤¶à¥‡à¤–र शरà¥à¤®à¤¾ की ओर से किया गया शोध पूरे देश में चरà¥à¤šà¤¾ का विषय बना हà¥à¤† है। पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ª पर किठगठइस विशिषà¥à¤Ÿ शोध में जमीनों के तामà¥à¤°à¤ªà¤¤à¥à¤°, जगदीश मंदिर पà¥à¤°à¤¶à¤¸à¥à¤¤à¤¿ व पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¥‹à¤‚ के आधार पर हलà¥à¤¦à¥€à¤˜à¤¾à¤Ÿà¥€ यà¥à¤¦à¥à¤§ में पà¥à¤°à¤¤à¤¾à¤ª की जीत पà¥à¤–à¥à¤¤à¤¾ दावा किया गया है। विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के हलà¥à¤¦à¥€à¤˜à¤¾à¤Ÿà¥€ à¤à¤ª में इतिहासकार डॉ. शरà¥à¤®à¤¾ के शोध का संपूरà¥à¤£ विवरण à¤à¥€ होगा। साथ ही ई-लाइबà¥à¤°à¥‡à¤°à¥€ सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ की जाà¤à¤—ी।
इतिहास का साकà¥à¤·à¥€ है टॉड à¤à¤µà¤¨: करà¥à¤¨à¤² जेमà¥à¤¸ टॉड ने 1818 से 1822 तक के राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ पà¥à¤°à¤µà¤¾à¤¸ में सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• समय विवि के डबोक परिसर में गà¥à¤œà¤¾à¤°à¤¾à¥¤ पूरे पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के इतिहास संबधी साकà¥à¤·à¥à¤¯ व शिलालेख यहीं जमा किठगà¤à¥¤ करà¥à¤¨à¤² टॉड ने ही अपनी कृति à¤à¤¨à¤²à¥à¤¸ à¤à¤‚ड à¤à¤•à¥à¤Ÿà¤¿à¤µà¤¿à¤Ÿà¥€à¤œ ऑफ राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में राजपूताना के लिठपहली बार राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨ शबà¥à¤¦ का पà¥à¤°à¤¯à¥à¤•à¥à¤¤ किया था।
यहां लिखे गठइतिहास को टॉड ने लंदन ले जाकर पहला खंड 1829 में व दूसरा 1832 में पà¥à¤°à¤•ाशित करवाया था।
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