उदयपुर की जयसमंद झील दे रही आदिवासियों को रोजगार, इस साल 2500 आदिवासियों ने की 95 लाख रुपए की कमाई

Patrika News Network

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उदयपुर. à¤œà¤¯à¤¸à¤®à¤‚द झील के आस-पास रहने वाले आदिवासियों के लिए यह झील रोजगार का प्रमुख साधन बन गई है। मछली पकडऩे वाले आदिवासियों को अब अपनी मेहनत का पूरा पैसा मिलने लग गया है। मत्स्य विभाग ने मछली उत्पादन अपने अधीन लेकर इनको कमाई का साधन उपलब्ध करवाया। इससे जुड़े करीब ढाई हजार सदस्यों ने इस साल करीब 95 लाख रुपए की कमाई की है। 

मत्स्य विभाग ने जयसमंद झील में मछली उत्पादन अपने अधीन लेते हुए मत्स्य उत्पादक सहकारी समिति बनाई। इसके करीब ढाई हजार आदिवासी मछुआरों को सदस्य बनाया। विभाग मछली उत्पादन के लिए मछुआरों को बीज उपलब्ध करवाता है। मछली उत्पादन शुरू होने के बाद राजसंघ इनको मछली पकडऩे के लिए जाल व नाव की सुविधा उपलब्ध करवाता है। सदस्य को भुगतान मछली की केटेगिरी के आधार पर किया जाता है, जो 10 से 100 रुपए प्रति किलोग्राम है। इनका भुगतान विभाग सलूम्बर में स्थित कॉपरेटिव बैंक के माध्यम से करता है।

पहले यह होता था

जयसमंद झील में पहले मछली पालन का कार्य मत्स्य विभाग निविदा के आधार पर ठेके पर दे देता था। आदिवासी मछुआरों को ठेकेदार के इच्छानुसार कार्य करना पड़ता था।

मत्स्य विभाग उदयपुर के उप निदेशक, आर.एम श्रीवास्तव का कहना है " जयसमंद के साथ ही बांसवाडा के माही बांध व डूंगरपुर के कडाना बैक वाटर में भी इस तरह से मछली उत्पादक का कार्य चल रहा है।"

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