अंतरराष्ट्रीय कहानी महोत्सव: अंतिम दिन छाई परम्परागत कहानियां, देश दुनिया से आए कलाकारों ने यूं स्मरणीय बनाया कहानियों को

Patrika news network Posted: 2017-02-27 12:19:05 IST

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उदयपुर.

जिंदगी जीने की जद्दोजहद में कहीं गुम हुए बचपन को किस्सागोई केजरिए किसी ने पाया तो कहीं नन्हें-मुन्नों को कहानियां सुनाते किसी को अपना अतीत याद आया। देस-दुनिया से आए कथाकारों और संगीतकारों ने अलग-अलग शैलियों में कठपुतली और पेंटिंग के जरिए न केवल कहानियां सुनाईं वरन आमजन में इस कला के प्रति चेतना और सम्मान भी जगाया। यूं भले ही रविवार को तीन दिवसीय पहले उदयपुर टेल्स फेस्टिवल का विधिवत समापन हो गया, लेकिन इसके साथ ही यह कार्यक्रम अपनी खुशबू बिखेरता सुनहरे भविष्य की संभावनाओंके बीज भी बो गया। मां माई एंकर फाउंडेशन द्वारा ब्रिक्स चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इन्डस्ट्रीज एवं राजस्थान पर्यटन विभाग की सहभागिता से आयोजित इस कार्यक्रम में अंतिम दिन अम्बामाता स्थित होटल ट्रिब्यूट में सबसे पहले कोरियाई कथाकार क्वान वू ने अपनी कहानी 'माई फादर' सुनाई।

अगले प्रस्तोता पुरस्कृत पत्रकार शान्तुन ने एमएस धोनी के जीवन से संबद्ध रोचक जानकारियां देकर आल्हादित कर दिया। इस दौरान रूसीयन कथाकार नाजिदा व सहयोगियों ने तथा गजल गायक शंशाक शेखर के साथ जुगलबंदी कर समां बांध दिया। समापन अवसर पर कार्यक्रम निदेशिका सुष्मिता शेखर ने कहा कि राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर कहानी को पुन: स्थापित करने हेतु विभिन्न समुदायों के मध्य समन्वय स्थापित करने के लिए विभिन्न मंचों के गठन के साथ-साथ इस बात पर भी गौर करना होगा कि कहानियों के मानकों को न सिर्फ स्थापित रखा जाए वरन् उसकी गुणवत्ता में भी बढ़ोत्तरी हो।महोत्सव की सार्थकता यह रही कि इस बहाने विभिन्न राज्यों, संस्कृतियों व समुदायों को आपस में जोड़ा। उन्होंने कहा कि यह महज एक शुरूआत है, इससे आगामी आयोजनों को और बेहतर बनाने के लिए न सिर्फ मार्ग प्रशस्ति मिलेगी अपितु समूचे विश्व में कहानी लेखन को पुष्पित-पल्लवित करने में मदद मिलेगी।

इस दौरान विभिन्न स्तरों पर कहानीकारों संग शहरवासियों और बच्चें का संवाद इस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा।

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