कांग्रेस में विधानसभा चुनाव के टिकटों के लिए बढ़ रही खेमेबंदी

जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे प्रदेश से लेकर जिला और विधानसभा स्तर पर कांग्रेसी नेताओं के गुटों में आपसी द्वंद शुरू हो गया है।

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चुनावी साल में कांग्रेस में गुटबाजी और धड़ेबंदी को लेकर फिर से राजनीतिक हलकों में चर्चांए जोरों पर हैं। कांग्रेस आलामान और प्रदेश नेतृत्व हर हाल में पार्टी को एकजुट रखकर चुनाव जीतने की जुगत में है। लेकिन खुलकर सामने आ रही धड़ेबंदी और नेताओं के मतभेद ने कांग्रेस नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी है।

कांग्रेस में जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे प्रदेश से लेकर जिला और विधानसभा स्तर पर नेताओं के गुटों में आपसी द्वंद शुरू हो गया है। चुनाव में अब लड़ाई टिकट की है। हर खेमा अपने समर्थकों के लिए ज्यादा से ज्यादा टिकट की दावेदारी कर रहा है। 'मेरा बूथ-मेरा गौरव' कार्यक्रम टिकटार्थी नेताओं के शक्ति प्रदर्शन का जरिया बन गए हैं। टिकट के दावेदार नेता पार्टी के कार्यक्रमों में भीड़ जुटाकर अपनी ताकत दिखा रहे हैं।

पहले संगठन चुनावों में भी पद पाने के लिए कांग्रेस में खूब जोड़ तोड़ चली। अब विधानसभा चुनाव का रण शुरू हो गया है तो कांग्रेस में टिकटों की दौड़ शुरु हो गई है। मौजूदा दौर में कांग्रेस में हर सीट पर नेता टिकटों के लिए जोर आजमाइश करते दिख रहे हैं। लेकिन टिकटों की यह दौड़ ही फील्ड में नेताओं का संग्राम बनती दिख रही है। हर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के टिकटार्थी खुद विरोधी का टिकट कटवाने और खुद की ताकत दिखाने की होड़ में जुट गए हैं। विधायकी का टिकट लेने और विरोधी का कटवाने की होड़ का नजारा फील्ड में कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी भी अपनी आंखों से देख चुके हैं।

चुनावी साल में कांग्रेस की गुटबाजी को लेकर पार्टी के भीतर जहां कई नेता चिंता जता रहे हैं तो वहीं कई नेताओं का मत है कि गुटबाजी कमजोरी होने के साथ साथ पार्टी की ताकत भी बनती है। कई जानकारों का मानना है कि चुनावी साल में पार्टी अलग अलग गुट ही अपने नेता को जितवाने के लिए फील्ड में जी जान लगाते हैं। हालांकि इस गुटबाजी का फायदा तभी मिलता है जब पार्टी के पक्ष में जनता में लहर हो। निकट का मुकाबला हो तो गुटबाजी के कारण कांग्रेस उम्मीदवार हारते हैं। कांग्रेस के हलकों में पुराने समय से ही नेता यह कहते सुने जाते है कि कांग्रेस उम्मीदवार को दो मोर्चों पर लड़ना पड़ता है। एक लड़ाई टिकट लेने के बाद खुद की पार्टी के दूसरे गुट से और उसके बाद में विरोधी पार्टी के उम्मीदवार से।

स्त्रोत: न्यूज़18

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