राजस्थान के विद्यालयों में अब दादी-नानी सुनाएंगी कहानियाँ

मौखिक विरासत को जीवित रखने के लिए राज्य सरकार की एक अनूठी पहल

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जयपुर: राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा विभाग ने राज्य की मौखिक विरासत को जिवंत रखने के लिए एक अनूठी पहल की शुरुआत की हैं जिसके तहत विद्यार्थियों की दादी-नानी उन्हें मौखिक परंपराओं और प्राचीन कथाओंसे अवगत कराती दिखेंगी|

दादी नानी के साथ बाल सभा, जैसा की इस पहल का नाम रखा गया हैं, के तहत विद्यालयों में विभिन्न सत्र चलाए जाएँगे जिसमे विद्यार्थियों की दादी अथवा नानी उनसे अवगत होनिग और उन्हें लोक कथाये सुनाएंगी| इस पहल से विभाग की आशा हैं की परिवार के बुजुर्गो को बच्चों की शिक्षा में भागीदारी निभाने का अवसर मिलेगा|

गौरतलब हैं की वर्तमान में बच्चों का जीवन में प्रौद्योगिकी द्वारा बाधित होता जा रहा हैं। उन्हें अत्याधुनिक आविष्कारों की जानकारी तोह होती हैं पर विरासत के विषय में वे बहुधा अज्ञात ही रह जाते हैं| भारत में मौखिक कहानी कहने की जो एक मजबूत परंपरा है, वह समय के साथ धूमिल होती जा रही हैं| ये मौखिक कथाएँ मानवीय जीवन के आधार से लेकर अनुभव तक कई ज्ञानवर्धक तत्व समेटे हुए हैं जिन्हें दादी-नानी से बेहतर और कोई नहीं समझा सकता| इस पहल से स्कूलों पर कोई अतिरिक्त  à¤µà¤¿à¤¤à¥à¤¤à¥€à¤¯ बोझ नहीं होगा और विद्यार्थियों को देश की प्राचीन परम्पराओं से अवगत होने का मौका भी मिलेगा|

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