Home news दीपोतà¥à¤¸à¤µ परà¥à¤µ की धमाकेदार शà¥à¤°à¥‚आत, जानिठदिवाली, गोवरà¥à¤§à¤¨ व à¤à¤¾à¤ˆà¤¦à¥‚ज पूजा का शà¥à¤ मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤
दीपोतà¥à¤¸à¤µ परà¥à¤µ की धमाकेदार शà¥à¤°à¥‚आत, जानिठदिवाली, गोवरà¥à¤§à¤¨ व à¤à¤¾à¤ˆà¤¦à¥‚ज पूजा का शà¥à¤ मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤
देश के सबसे बड़े दीपोतà¥à¤¸à¤µ उतà¥à¤¸à¤µ की शà¥à¤°à¥‚आत हो गई है। दीपोतà¥à¤¸à¤µ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤°à¥à¤· का सबसे बड़ा और à¤à¤¾à¤°à¥€ सà¥à¤¤à¤° पर मनाया जाने वाला परà¥à¤µ है जो लगातार 5 दिनों तक चलता है।
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देश के सबसे बड़े दीपोतà¥à¤¸à¤µ उतà¥à¤¸à¤µ की शà¥à¤°à¥‚आत हो गई है। दीपोतà¥à¤¸à¤µ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤°à¥à¤· का सबसे बड़ा और à¤à¤¾à¤°à¥€ सà¥à¤¤à¤° पर मनाया जाने वाला परà¥à¤µ है जो लगातार 5 दिनों तक चलता है। धारà¥à¤®à¤¿à¤• मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾à¤“ं के साथ घर व परिवार में सà¥à¤–-समृदà¥à¤§à¤¿ लिठयह परà¥à¤µ हिंदू धरà¥à¤® के मानने वालों के लिठबड़ा ही शà¥à¤ व पवितà¥à¤° परà¥à¤µ है जिसे उतà¥à¤¸à¤¾à¤¹ व उमंग के साथ सहपरिवार मनाया जाता है। मिठाईयों के आदान-पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ के साथ यह खà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ पड़ौसियों सहित अनà¥à¤¯ लोगों को à¤à¥€ दी जाती है और सà¥à¤µà¤¯à¤‚ के साथ अनà¥à¤¯ की à¤à¥€ सà¥à¤–-समृदà¥à¤§à¤¿ की कामना की जाती है। कौन से हैं दीपोतà¥à¤¸à¤µ के 5 खास तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤°, आइठजानते हैं इनके बारे में ....
दीपोतà¥à¤¸à¤µ का पहला परà¥à¤µ- धनतेरस
धनतेरस आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ के जनक और आरोगà¥à¤¯ के देवता धनà¥à¤µà¤‚तरि का जनà¥à¤®à¤¦à¤¿à¤µà¤¸ है। इस दिन जमकर खरीददारी की जाती है। अगर खरीददारी न à¤à¥€ हो तो à¤à¥€ इस दिन à¤à¤• बरà¥à¤¤à¤¨ खरीदकर जरूर घर लाना चाहिà¤à¥¤ इस धनतेरस पर पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶à¤à¤° में करीब 10 हजार करोड़ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ का वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤¾à¤° हà¥à¤† है जिनमें मोटरसाइकिल, कारें, पà¥à¤°à¥‹à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥€ व बरà¥à¤¤à¤¨ आदि की खरीदारी शामिल है।
दीपोतà¥à¤¸à¤µ का दूसरा परà¥à¤µ- रूपचौदस
कारà¥à¤¤à¤¿à¤• कृषà¥à¤£ चतà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¥€ यानि छोटी दिवाली को ही रूपचौदस कहा जाता है जो 6 नवमà¥à¤¬à¤° को है। यह 5 दिवसीय दीपोतà¥à¤¸à¤µ का दूसरा और खास तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° है जो धनतेरस के तà¥à¤°à¤‚त बाद और दीपावली से à¤à¤• दिन पहले आता है। इसलिठही इसे छोटी दिवाली à¤à¥€ कहते हैं। रूपचौदस को नरक चतà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¥€ या काली चतà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¥€ à¤à¥€ कहा जाता है। माना जाता है कि कारà¥à¤¤à¤¿à¤• कृषà¥à¤£ चतà¥à¤°à¥à¤¦à¤¶à¥€ के दिन विधि—विधान से पूजा करने वाले वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को सà¤à¥€ पापों से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ मिल जाती है। यह परà¥à¤µ बà¥à¤°à¤¾à¤ˆ के अंत के रà¥à¤ª में मनाया जाता है। आज ही के दिन शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ ने नरकासà¥à¤° का वध कर लोगों को à¤à¤¯ से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ दिलाई थी इसलिठइस परà¥à¤µ का खास महतà¥à¤µ है। रूपचौदस के दिन तिल का तेल लगा उपटन करके सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ करने का विधान है। मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि इस दिन तेल में लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ और पानी में गंगा का निवास रहता है। घर का दारिदà¥à¤° दूर करने व शà¥à¤-समृदà¥à¤§à¤¿ के लिठशाम को घर के बाहर 7 या 11 दीपक जलाठजाने की à¤à¥€ मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है।
दीपोतà¥à¤¸à¤µ का तीसरा परà¥à¤µ- दीपावली
बà¥à¤§à¤µà¤¾à¤° को दीपोतà¥à¤¸à¤µ का तीसरा परà¥à¤µ दीपावली है। à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€à¤°à¤¾à¤® चनà¥à¤¦à¥à¤° के 14 साल के वनवास के बाद अयोधà¥à¤¯à¤¾ वापिस लौटने के लिठमनाया जाने यह तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° हिंदू धरà¥à¤® मानने वालों के लिठसाल का सबसे बड़ा तà¥à¤¯à¥‹à¤¹à¤¾à¤° है। आज के शà¥à¤ दिन पर शà¥à¤°à¥€à¤°à¤¾à¤® परिवार के साथ परम पूजनीय शà¥à¤°à¥€à¤—णेश और महालकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ की पूजा की जाती है।
घरों में महालकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ पूजन का सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤ –
घरों में दीपावली की रात महालकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ पूजन का सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤ शाम 6:20 से 6:33 बजे तक पà¥à¤°à¤¦à¥‹à¤· काल, सà¥à¤¥à¤¿à¤° लगà¥à¤¨ और सà¥à¤¥à¤¿à¤° नवमांश कà¥à¤‚ठरहेगा।
महालकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ पूजन का चौघड़िया –
शà¥à¤: शाम 7:17 बजे से 8:55 बजे तक
अमृत: रात 8:56 बजे से 10:33 बजे तक
चर: रात 10:34 बजे से 12:44 बजे तक
सà¥à¤¥à¤¿à¤° लगà¥à¤¨ के मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤ –
वृशà¥à¤šà¤¿à¤šà¤• लगà¥à¤¨: सà¥à¤¬à¤¹ 7:28 बजे से 9:46 बजे तक
कà¥à¤‚à¤: दोपहर 1:34 बजे से 3:04 बजे तक
वृष: शाम 6:08 बजे से रात 8:05 बजे तक
सिंह: रात 12:38 बजे से 2:54 बजे तक
दीपोतà¥à¤¸à¤µ का चौथा परà¥à¤µ- गोवरà¥à¤§à¤¨
दीपावली के ठीग अगले दिन कारà¥à¤¤à¤¿à¤• शà¥à¤•à¥à¤² पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤ªà¤¦à¤¾ यानि गोवरà¥à¤§à¤¨ परà¥à¤µ मनाया जाता है। धारà¥à¤®à¤¿à¤• मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, जो वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ इस दिन दà¥à¤–ी रहेगा, वह वरà¥à¤·à¤à¤° दà¥à¤–ी ही रहेगा। जो वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ गोवरà¥à¤§à¤¨ के शà¥à¤ मौके पर खà¥à¤¶ रहेगा, वह वरà¥à¤·à¤ªà¤°à¥à¤¯à¤‚त पà¥à¤°à¤¸à¤¨à¥à¤¨ रहेगा। इस परà¥à¤µ को अनà¥à¤¨à¤•ूट परà¥à¤µ के के नाम से à¤à¥€ जानते हैं कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस दिन जगह-जगह मंदिरों में अनà¥à¤¨à¤•ूट पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦à¥€ का वितरण होता है। यह परà¥à¤µ उतà¥à¤¤à¤° à¤à¤¾à¤°à¤¤ और खासतौर पर मथà¥à¤°à¤¾ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में अति उलà¥à¤²à¤¾à¤¸ के साथ मनाया जाता है। गोवरà¥à¤§à¤¨ पूजा में गोधन यानि गायों की पूजा का à¤à¥€ अतà¥à¤¯à¤‚त महतà¥à¤µ है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ के कई सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ पर आज के दिन राजा बलि की पूजा à¤à¥€ की जाती है।
दीपोतà¥à¤¸à¤µ का 5वां परà¥à¤µ- à¤à¤¾à¤ˆà¤¦à¥‚ज
पांच दिवसीय दीपोतà¥à¤¸à¤µ का आखिरी परà¥à¤µ है à¤à¤¾à¤ˆà¤¦à¥‚ज या कारà¥à¤¤à¤¿à¤• शà¥à¤•à¥à¤² दूज। यह परà¥à¤µ à¤à¤¾à¤ˆ-बहिन के पवितà¥à¤° रिशà¥à¤¤à¥‹à¤‚ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤à¥‚ति है। यह परà¥à¤µ कारà¥à¤¤à¤¿à¤• मास के शà¥à¤•à¥à¤² पकà¥à¤· की दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾ तिथि को मनाया जाता है। आज के दिन बहिनों अपने à¤à¤¾à¤ˆà¤¯à¥‹à¤‚ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ और लंबी आयॠके लिठकामना करते हà¥à¤ दूज माता का पूजन करती हैं। पूजन और à¤à¤¾à¤ˆà¤¯à¥‹à¤‚ के तिलक दिलाकर ही बहिनें खाना खाà¤à¤‚गी। à¤à¤¾à¤ˆ दूज को à¤à¤¾à¤Š बीज और à¤à¤¾à¤¤à¥ƒ दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¥€à¤¯à¤¾ के नाम से à¤à¥€ जाना जाता है।
à¤à¤¾à¤ˆ दूज 2018 शà¥à¤ मà¥à¤¹à¥‚रà¥à¤¤ –
09 नवमà¥à¤¬à¤° 2018 - 01:09 से 03:17 तक
दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾ तिथि पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤®à¥à¤ - 09 नवमà¥à¤¬à¤° 2018- शाम 07:07 से
दà¥à¤µà¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾ तिथि समापà¥à¤¤ - 09 नवमà¥à¤¬à¤° 2018- शाम 07:20 तक
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