PALI: यहाँ निकलती है बादशाह-बीरबल की शाही सवारी, कुछ ही घंटे में बादशाह बाँट देता है करोड़ों की खर्ची

Patrika news network Mar 14, 2017, 19:37 IST

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पाली. à¤¬à¤¾à¤¦à¤¶à¤¾à¤¹ खर्ची दो...व ले एक करोड़... ये वाक्य मंगलवार शाम को पहले धानमण्डी चौक में और इसके बाद शहर के बाजारों व गलियों में गूंजे। जनता बादशाह, शहजादे से होली की खर्ची मांगती रही और बादशाह ने भी खजाने के द्वार खोल और दिल के द्वार खोलकर खर्ची बांटी।

धानमण्डी चौक से निकले वाली बादशाह की सवारी से पहले शाम पांच बजे जैसे ही बादशाह बने अग्रवाल समाज के रमेश बसंल ब्यावर के, शहजादा बने माहेश्वरी समाज के आनन्दप्रकाश के मंच पर आते ही खर्ची लेने के लिए शहरवासियों का हुजूम उमड़ा। लोगों ने बादशाह खर्ची दो... बोलते हुए खर्ची मांगी तो बादशाह व शहजादे ने भी किसी को एक करोड़ तो किसी को दस करोड़ रुपए तक की खर्ची (गुलाल) दे दी। मान्यता है कि बादशाह की ओर से दी जाने वाले गुलाल को सहेज कर रखने और उनकी ओर से दी खर्ची के अनुसार ही व्यापार होता है।

बीरबल के झण्डा लहराने के बाद शुरू हुई सवारी

बादशाह के खर्ची बांटना शुरू करने के कुछ समय बाद पुष्करणा समाज की ओर से बीरबल बने मयंक बोहरा झण्डा लेकर आनन्द भैरू मंदिर के आगे से गुजरे और जुनी कचहरी में ध्वज घुमाया। इसके बाद बीरबल की अगवानी में बादशाह की सवारी शुरू हुई। जो सोमनाथ मंदिर, भैरूघाट, पानी दरवाजा, बादशाह का झण्डा, जर्दा बाजार, सर्राफा बाजार, बाईसी बाजार व घी का झण्डा होकर वापस धानमण्डी पहुंचकर विसर्जित हुई।

गुलाल से सराबोर हुई गलियां

बादशाह की सवारी जिस मार्ग से भी गुजरी। शहरवासियों ने खर्ची मांगी तो बादशाह व शहजादे में गुलाल फेंककर खर्ची दी। सवारी में उड़ी गुलाल के कारण शहर की गलियां व बाजार सराबोर हो गए। बादशाह की सवारी के साथ दुपहिया वाहनों पर और पैदल चलते युवा भी गुलाल उड़ाते चले।

आज खुलेंगे बाजार

शहर में गांवशाही गेर के प्यारा चौक से पास होने के दूसरे दिन बादशाह की सवारी निकलती है। इसके बाद ही मुख्य आजार खुलते है। इसी परम्परा के चलते धुलण्डी व मंगलवार को बंद बाजार अब बुधवार को फिर से खुलेंगे और व्यापार शुरू होगा।

कई जगह रहा अंधेरा

बादशाह की सवारी के मार्ग में कई जगह अंधेरा रहा। इससे शहरवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। जबकि शांति समिति की बैठक में जिला कलक्टर ने डिस्कॉम के अधिकारियों को सवारी के मार्ग में लाइट की व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए थे। इसके बावजूद ध्यान नहीं दिया गया। 

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