Home news à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ गेमà¥à¤¸ में बाड़मेर के जितेनà¥à¤¦à¥à¤° सिंह ने दिलाया सिलà¥à¤µà¤° मेडल
à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ गेमà¥à¤¸ में बाड़मेर के जितेनà¥à¤¦à¥à¤° सिंह ने दिलाया सिलà¥à¤µà¤° मेडल
जकारà¥à¤¤à¤¾ में चल रहे 18वें à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ गेमà¥à¤¸ में घà¥à¤¡à¤¼à¤¸à¤µà¤¾à¤° जंपिंग टीम इवेंट में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ टीम ने सिलà¥à¤µà¤° मेडल जीत इतिहास रच दिया। टीम में बाड़मेर (राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨) का जितेनà¥à¤¦à¥à¤° सिंह à¤à¥€ शामिल है।
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जकारà¥à¤¤à¤¾ में चल रहे 18वें à¤à¤¶à¤¿à¤¯à¤¨ गेमà¥à¤¸ में घà¥à¤¡à¤¼à¤¸à¤µà¤¾à¤° जंपिंग टीम इवेंट में à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ टीम ने सिलà¥à¤µà¤° मेडल जीत इतिहास रच दिया। टीम में बाड़मेर (राजसà¥à¤¥à¤¾à¤¨) का जितेनà¥à¤¦à¥à¤° सिंह à¤à¥€ शामिल है। जितेनà¥à¤¦à¥à¤° के अलावा 4 सदसà¥à¤¯à¥€à¤¯ टीम में फवाद, राकेश कà¥à¤®à¤¾à¤° और आशीष मलिक à¤à¥€ हैं। टीम ने संयà¥à¤•à¥à¤¤ रूप से 121.30 सेकेंड का समय निकाल रजत पदक अपने नाम किया है। टीम इवेंट में 12 साल बाद कोई मेडल देश की à¤à¥‹à¤²à¥€ में आया है। इससे पहले 2006 में दोहा में बà¥à¤°à¥‰à¤¨à¥à¤œ मिला था। इंडिविजà¥à¤…ल केटेगिरी में फवाद मिरà¥à¤œà¤¾ ने सिलà¥à¤µà¤° जीता है। बता दें, 36 साल बाद इस केटेगिरी में किसी à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ को कोई मेडल मिला है।
सेना की राइडिंग विंग में कारà¥à¤¯à¤°à¤¤ हैं जितेनà¥à¤¦à¥à¤°
जितेनà¥à¤¦à¥à¤° सिंह (26) बाड़मेर जिले के मगरा गांव का निवासी है। जितेनà¥à¤¦à¥à¤° के पिता पहाड़ सिहं किसान हैं और पढ़े-लिखे नहीं है। जितेनà¥à¤¦à¥à¤° की पढ़ाई गांव के सरकारी सà¥à¤•ूल में हà¥à¤ˆ है। घà¥à¤¡à¤¼à¤¸à¤µà¤¾à¤°à¥€ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ जितेनà¥à¤¦à¥à¤° सिंह का रूà¤à¤¾à¤¨ अपने मामा गà¥à¤²à¤¾à¤¬à¤¸à¤¿à¤‚ह के कारण बढ़ा जो मेरठमें à¤à¤• फौजी अधिकारी थे। 8वीं पास करने के बाद जितेनà¥à¤¦à¥à¤° का à¤à¤¡à¤®à¤¿à¤¶à¤¨ मेरण के आरà¥à¤®à¥€ सà¥à¤•ूल में हà¥à¤† जहां उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने घà¥à¤¡à¤¼à¤¸à¤µà¤¾à¤°à¥€ सीखी और सेना की राइडिंग विंग में à¤à¤°à¥à¤¤à¥€ हो गà¤à¥¤ राजà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤à¤° पर उमà¥à¤¦à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ के बाद उनका राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤—िता में चयन हà¥à¤†à¥¤ लगातार बेहतर पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨ कर à¤à¤¡à¤¿à¤¯à¤¾à¤¡ खेलों की घà¥à¤¡à¤¼à¤¸à¤µà¤¾à¤°à¥€ टीम में जगह बनाई और बिना निराश किठसिलà¥à¤µà¤° मेडल लेकर वहां से आà¤à¥¤ जितेनà¥à¤¦à¥à¤° ने इससे पहले मई, 2018 में फà¥à¤°à¤¾à¤‚स में आयोजित अंतरराषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯ घà¥à¤¡à¤¼à¤¸à¤µà¤¾à¤°à¥€ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤—िता में à¤à¥€ देश को कांसà¥à¤¯ पदक दिलाया था।
à¤à¤• दिन पहले मिला à¤à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ कारà¥à¤¡
बता दें, पूरà¥à¤µ में घà¥à¤¡à¤¼à¤¸à¤µà¤¾à¤°à¥€ संघ के अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· ने टीम को गेमà¥à¤¸ में à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡ से इंकार कर दिया था। बाद में केनà¥à¤¦à¥à¤°à¥€à¤¯ खेल मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ के हसà¥à¤¤à¤•à¥à¤·à¥‡à¤ª के बाद टीम को गेमà¥à¤¸ में à¤à¥‡à¤œà¤¨à¥‡ का फैसला किया गया। जकारà¥à¤¤à¤¾ रवाना होने के à¤à¤• दिन पहले खिलाड़ियों को à¤à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥‡à¤¶à¤¨ कारà¥à¤¡à¤¼ दिठगठथे।
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